नंदलाल तुरी
संताल परगना समन्वय समिति के बैनर तले आज गुरुवार को पाकुड़ में आदिवासी जनाक्रोश रैली किया गया, जिसमें जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आए हजारों आदिवासी समाज के लोग, छात्र, युवा, बुद्धिजीवी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पारंपरिक हथियारों, वेशभूषा और नारों के साथ एकजुट होकर भाग लिया। रैली का उद्देश्य सूर्या नारायण हांसदा प्रकरण की CBI जांच की मांग और कुर्मी/कुड़मी/महतो समुदाय को ST सूची में शामिल किए जाने की मांग का पुरजोर विरोध करना था।
रैली लड्डू बाबू बागान से प्रारंभ होकर हरिनडांगा बाजार होते हुए उपायुक्त कार्यालय, पाकुड़ पहुंची, जहाँ एक सभा के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। मौके पर दो महत्वपूर्ण दस्तावेज सूर्या नारायण हांसदा प्रकरण की CBI जांच हेतु मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र और कुर्मी–कुड़मी–महतो समुदाय को ST में शामिल करने के विरोध में राष्ट्रपति के नाम याचना-पत्र उपायुक्त के माध्यम से भेजे गए।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि सूर्या नारायण हांसदा एक समर्पित समाजसेवी थे, चार बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे और अपने ट्रस्ट के माध्यम से करीब 300 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते थे। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और उनके साथ गंभीर अन्याय हुआ। जनसभा में यह भी कहा गया कि समाजसेवा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग करना, जल-जंगल-जमीन की रक्षा की बात करना यदि अपराध हो गया है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
इसी के साथ कुर्मी/कुड़मी/महतो समुदाय की ST मांग पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। वक्ताओं ने कहा कि ब्रिटिश काल में कुर्मी समाज ने खुद को क्षत्रिय बताया और आदिवासी समाज से अलग होने की मुहिम चलाई थी। आजादी के 79 साल बाद अचानक आदिवासी बताकर ST सूची में शामिल होना वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है। यह मांग आदिवासी समाज के आरक्षण, पहचान और अस्तित्व पर सीधा हमला है, जिसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा।
झारखंड क्रांति सेना के केंद्रीय अध्यक्ष अमर मरांडी ने सूर्या हांसदा प्रकरण को “सुनियोजित हत्या और लीपापोती” बताया। केंद्रीय महासचिव निखिल मुर्मू ने प्रश्न उठाया कि मुख्यमंत्री ने 2018 में कुर्मी समाज को ST सूची में शामिल करने की अनुशंसा आखिर किस तथ्यों के आधार पर की थी। छात्र समन्वय समिति के पदाधिकारी डॉ. श्यामदेव ब्रम और राजीव बासकी ने कहा कि CBI जांच के बिना सूर्या हांसदा परिवार को न्याय नहीं मिलेगा।
संताल परगना समन्वय समिति, पाकुड़ टीम के सदस्य राहुल राज मरांडी, अजय मरांडी, अशोक कोल, मसीह मुर्मू, श्यामलाल कोल और मदन मरांडी ने कहा कि सूर्या नारायण हांसदा को न्याय दिलाने का संघर्ष जारी रहेगा और कुर्मी समुदाय की ST मांग झारखंड की सामाजिक एकता को तोड़ने की साजिश है, जिसे सरकार को तत्काल संज्ञान में लेकर समाधान करना होगा। रैली में झारखंड क्रांति सेना, छात्र समन्वय समिति, सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, मांझी परगना लाहानती बैसी, भारत आदिवासी कोल समाज सहित कई संगठनों ने सक्रियता से भाग लिया और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का संकल्प लिया।
