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TGT–21 वालों की देरी से नियुक्ति प्रशासनिक लापरवाही, उन्हें भी दें वरीयता का लाभ– हाईकोर्ट

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी)-2021 नियुक्ति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सरकार की प्रशासनिक देरी का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना पड़ेगा। अदालत ने निर्देश दिया कि प्रशासनिक कारणों से तीन वर्ष की देरी से नियुक्त हुए शिक्षकों को उनके साथ चयनित अन्य अभ्यर्थियों की तरह वरिष्ठता, अपग्रेड वेतनमान और वित्तीय लाभ दिए जाएं। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने करीब आठ याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 की टीजीटी नियुक्ति प्रक्रिया में चयनित 12 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों को समान वरिष्ठता और सेवा लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने कहा कि नियुक्ति में हुई देरी के लिए अभ्यर्थी किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं हैं, इसलिए उन्हें उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।


आरक्षण नीति और मेरिट सूची को लेकर उठा था विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2016 की टीजीटी नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण नीति, जिला और राज्य स्तरीय मेरिट सूची तथा चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आरक्षण के कारण अधिक अंक पाने वाले कई अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए, जबकि कम अंक वाले उम्मीदवारों का चयन हो गया। इस कारण नियुक्ति प्रक्रिया लंबी चली और कई शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2021 में जाकर हो सकी।


हजारों शिक्षकों को मिल सकता है फैसले का लाभ
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य के विभिन्न जिलों में वर्ष 2020 से 2023 के बीच करीब 4,282 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। ऐसे में हाईकोर्ट के इस फैसले का लाभ बड़ी संख्या में उन शिक्षकों को मिल सकता है, जिनकी नियुक्ति प्रशासनिक विलंब के कारण देर से हुई थी। अदालत के इस आदेश को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

Tags - Jharkhand High Court TJT 21 Teachers Seniority Education