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आउट सोर्स कर्मियों के दिन कुछ बदलेंगे, मानदेय बढोत्तरी पर बनी सहमति

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द फॉलोअप डेस्क
जल्द ही झारखंड में कार्यरत आउट सोर्स कर्मियों के दिन कुछ बदलेंगे। उनके वेतन में सम्मानजनक बढोत्तरी होगी। सेवा शर्तें भी पहले से बेतर होगा। वित्त विभाग के विशेष सचिव अमित कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी की बैठक में आउट सोर्स कर्मियों के मानदेय बढेत्तरी सहित कई अन्य मुद्दों पर सहमति बन गयी है। कमेटी कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। उसके बाद राज्य सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अलग अलग कैटेगरी के आउट सोर्स कर्मियों का चार हजार रुपए से लेकर 40 हजार रुपए प्रति माह मानदेय बढोत्तरी की संभावना है। मसलन कंप्युटर ऑपरेटरों को लगभग 25 हजार, स्किल्ड मजदूर को लगभग 21000, अनस्किल्ड मजदूर को लगभग 19000, प्रोग्रामर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और इससे जुड़े अन्य कर्मियों को 60 हजार रुपए से एक लाख रुपए तक का मानदेय दिए जाने पर सहमति बनी है। आउट सोर्स पर कार्यरत वाहन चालकों को भी लगभग 25 हजार रुपए मानदेय मिल सकता है। यहां मालूम हो कि यूपी, एमपी, बिहार समेत देश के कई अन्य राज्यों ने आउट सोर्स कर्मियों के सेवा शर्तों में बदलाव किया है। एक सम्मानजनक मानदेय तय किया है।


यहां मालूम हो कि राज्य सरकार ने 22 मई 2025 को हुई कैबिनेट की बैठक में झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विस मैन्युअल को मंजूरी दी थी। इसके बाद मानदेय बढोत्तरी और बेहतर सेवा शर्तों के निर्धारण के लिए वित्त विभाग के विशेष सचिव अमित कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी का भी गठन किया गया था। इस कमेटी में अमित कुमार के अलावा जैप आईटी के सीईओ, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संयुक्त सचिव आसिफ हसन और श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के उप सचिव रेज्युस बाढ़ को सदस्य बनाया गया। लेकि महीनों तक जैप आईटी के सीईओ का पद रिक्त रहने के कारण कमेटी की बैठक ही नहीं हो रही थी। जैप आईटी के सीओ पद पर पदस्थापन होने के बाद 27 दिसंबर को कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में कई तरह के निर्णय लिए गए। इस बैठक में आउट सोर्स कंपनी या एजेंसियों के चयन से लेकर मानदेय बढोत्तरी, ईपीएफ की राशि, एजेंसियों का कमीशन संबंधी कई मुद्दों पर सहमति बनायी गयी। उसमें एजेंसियों के लिए भी शर्तें निर्धारित करने पर विचार किया गया। मसलन राज्य सरकार द्वारा देय राशि में से कंपनी के कमीशन की राशि को निर्धारित किया गया है। उसे ईपीएफ की राशि कटौती कर जमा करने संबंधी शर्तों को कड़ा किया गया है। मालूम हो कि इन एजेंसियों द्वारा राज्य सरकार द्वारा दी जा रही राशि में से भारी कटौती कर ली जा रही है। साथ ही कटौती की कोई एकरुपता नहीं है। समय पर ईपीएफ की राशि भी जमा नहीं की जा रही है।


यहां मालूम हो कि झारखंड में आउटसोर्स पर काम कर रहे कर्मियों के लिए झारखंड मैनपॉवर आउटसोर्सिंग को रेगुलेशन  के अनुसार अब कोई भी कर्मी कम से कम 5 साल के लिए आउटसोर्स पर रखे जाएंगे। फिर उसे 3 साल का एक्सटेंशन मिल सकेगा। उसे प्रति वर्ष तीन फ़ीसदी का इंक्रीमेंट मिलेगा। सर्विस प्रोवाइडर को न्यूनतम वेतन देना होगा। नियुक्ति में आरक्षण का अनुपालन किया जाएगा। जैप आईटी में एक गिरिवांस सेल का भी गठन किया जाएगा। आउटसोर्स कर्मियों को 400000 तक का एक्सीडेंटल ग्रुप इंश्योरेंस भी होगा। 


 

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