द फॉलोअप, रांची:
देश को सैंकड़ों आईएएस-आईपीएस अधिकारी देने वाला प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान आज छात्रों को संस्कार देने के बदले खुद प्राचार्य पद को लेकर उलझा हुआ है। आपस में झगड़ रहा है। विद्यालय के पढ़ाई का माहौल पूरी तरह खराब हो रहा है। परीक्षाएं प्रभावित हो रही हैं। राज्य और देश के लिए कुछ कर गुजरने के उद्देश्य से यहां नामांकन कराने वाले छात्र परेशान हैं। उनके अभिभावक भी हैरान और हलकान हैं। इसके बावजूद विद्यालय के प्रबंधन की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। न्यायालयों के आदेश के बाद भी विद्यालय में आपसी टकराव और गुटबाजी बढ़ती जा रही है।

क्या है विवाद के कारण
नेतरहाट विद्यालय की प्रबंधकीय व्यवस्था को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर( WPC 4052/2025) की गयी है। इसकी सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ 16 अप्रैल 2026 को विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र और रिटायर आईएएस अधिकारी राजकुमार को नेतरहाट विद्यालय समिति की तदर्थ समिति (Ad-hoc Executive Committee) का सभापति नियुक्त करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में राजकुमार ने 18 अप्रैल 2026 को पदभार ग्रहण कर लिया। इसके बाद सभापति के अधिकारों का उपयोग करते हुए राजकुमार ने विद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के अध्यक्ष रवि रंजन को प्रभारी प्राचार्य बनाने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने 14 अगस्त को प्रभारी प्राचार्य का पदभार भी ग्रहण कर लिया। उधर विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य, जिन पर कई तरह की वित्तीय अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचार के आरोप हैं, पद छोड़ने को तैयार नहीं है। इस तरह विवाद बढ़ता जा रहा है। विद्यालय परिसर में कानून व्यवस्था की भी स्थिति उत्पन्न हो रही है। रविरंजन का कहना है कि उन्होंने 14 अगस्त को प्रभार संभाल लिया था और अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष को भेज दी थी। हालांकि, आगे का काम करने के लिए कार्यालय अभी भी उनके नियंत्रण में नहीं आया है।
