हजारीबाग:
हजारीबाग के चौपारण प्रखंड अंतर्गत ताजपुर पंचायत में कथित तौर पर 190 लोगों का नाम फॉर्म-7 में दर्ज किए जाने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि इन नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि गुरुवार को ताजपुर पंचायत की बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) शहजादी खातून को फॉर्म-7 संबधित कई दस्तावेज सौंपे गए थे। दावा है कि पंकज बर्णवाल और रवि विश्वकर्मा नाम के शख्स ने पूरे विवरण हस्ताक्षर सहित फॉर्म-7 BLO को सौंपा था। दावा है कि इस सूची में BLO शहजादी खातून और उनके परिवार का नाम भी शामिल है।
आरोप है कि ताजपुर पंचायत के पूर्व मुखिया शौकत खान का नाम भी फॉर्म-7 में दर्ज है। गौरतलब है कि SIR की प्रक्रिया में फॉर्म-7 मतदाता का नाम हटाने के लिए होता है।

सभी मतदाता ताजपुर में ही रहते हैं!
ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर यह सूची किस प्रकार तैयार की गई है कि BLO, उनके परिवार और पंचायत के पूर्व जनप्रतिनिधि तक का नाम इसमें शामिल है। गौरतलब है कि फॉर्म-7 उनके लिए होता है, जिनका नाम मतदाता सूची से हटाना हो। इसके लिए कुछ आधार तय किया गया है, मसलन- किसी की मृत्यु हो गई है। किसी ने स्थायी रूप से अपना पता बदल लिया हो। कोई स्थानांतरित हो गया हो या किसी का नाम मतदाता सूची में 2 बार दर्ज किया गया है। हालांकि, चौपारण प्रखंड के ताजपुर पंचायत में जिन मतदाताओं की सूची फॉर्म-7 में सौंपी गई है, दावा है कि वे सभी लोग उसी गांव में स्थायी रूप से रहते हैं।
ग्रामीणों ने सवाल किया है कि एक ही पंचायत के बड़ी संख्या में समुदाय विशेष के लोगों का नाम फॉर्म-7 में होना महज संयोग है कि सुनियोजित साजिश। ग्रामीणों ने इसकी जांच की मांग की है।

पूर्व विधायक ने डीसी से की है शिकायत
अब बरही के पूर्व विधायक उमाशंकर अकेला ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त से फोन पर बात की। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की। बताया गया कि उपायुक्त ने मामले की जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि समुदाय विशेष के लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे मुस्लिमों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं होने दिया जायेगा।
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आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी
अभी इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। ये भी पता लगाया जाना बाकी है कि 190 लोगों का नाम फॉर्म-7 में दर्ज करने का आधार क्या था। ग्रामीणों का कहना है कि कई लोग वर्ष 2003 में मतदान कर चुके हैं। वर्षों से क्षेत्र में रह रहे हैं और कई तो चुनाव में जनप्रतिनिधि तक रह चुके हैं। ऐसे में अचानक उनके नामों को हटाने की प्रक्रिया क्यों शुरू हुई यह सबसे बड़ा सवाल है।
फॉर्म-7 में दर्ज नामों की निष्पक्ष जांच की मांग
लोगों ने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, लेकिन ताजपुर पंचायत का यह मामला अब इसी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि Form-7 में दर्ज सभी 190 नामों की निष्पक्ष जांच हो, दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का सत्यापन कराया जाए और पात्र मतदाताओं का नाम किसी भी कीमत पर मतदाता सूची से न हटाया जाए।