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धनबाद नगर निगम के मेयर पद के आरक्षण पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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द फॉलोअप डेस्क
धनबाद नगर निगम के मेयर पद को एससी के लिए आरक्षित करने पर हुई सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम सोनक की दो सदस्यीय खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। शांतनु कुमार चंद्रा की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके वकील ने राज्य के नगर निगमों को दो खंडों में बांटने का विरोध किया। साथ ही कहा कि जनसंख्या के आधार पर आरक्षण दिए जाने पर धनबाद नगर निगम के मेयर का पद एससी के लिए आरक्षित होगा। इसके पक्ष में उनके वकील ने कई तर्क दिए।


वहीं राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि कई अन्य राज्यों में महानगर पालिका बनाया गया है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले रांची और जमशेदपुर नगर निगम को उसी आधार पर वर्ग क में रखा गया है। अगर धनबाद नगर निगम के मेयर का पद आरक्षित किया जाता है तो वर्ग क के रांची और धनबाद नगर निगम में 100 फीसदी आरक्षण हो जाएगा। यह संविधान के प्रावधान के विपरीत होगा। लगभग डेढ़ घंटे चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस ने फैसला सुरक्षित रख लिया।


यहां मालूम हो कि अगले कुछ दिनों में राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकायों में चुनाव कराने की घोषणा कर सकती है। राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव संबंधी कार्यक्रमों पर अपनी सहमति दे दी है। इसके बाद आयोग को विधिवत अधिसूचना जारी कर चुनाव कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इस बीच हाईकोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रख लिए जाने के बाद अजीब संशय की स्थिति है। क्योंकि कोर्ट के फैसले पर ही निकायों के चुनाव का भविष्य निर्भर करेगा।

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