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नाम बदले जाने के विरोध में कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम का शुभारंभ

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द फॉलोअप डेस्क 
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून को बदलने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत बापू वाटिका से लोक भवन तक पैदल मार्च निकाला गया जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी श्री के राजू तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सीरीबेला प्रसाद, भूपेंद्र मारावी, प्रणव झा उपस्थित थे। मार्च के पूर्व महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात मनरेगा कानून बदलने के विरोध में अनवरत संघर्ष हेतु कांग्रेस जनों को केशव महतो कमलेश ने शपथ दिलाया।

इस अवसर पर के राजू ने कहा कि मनरेगा के तहत यूपीए सरकार ने लोगों को 100 दिनों के रोजगार का हक कानून बना कर दिया था,काम का निर्धारण भी ग्राम पंचायत के हाथों में था। मनरेगा का मूल था कि पंचायत का विकास पंचायत के लोगों के हाथों से हो।मनरेगा से गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली,विश्व के अधिकांश देशों ने मनरेगा मॉडल का अध्ययन कर उसे ग्रामीण विकास का मजबूत आधार माना कई देशों ने इस मॉडल को अपनाया। कोविड काल में लाखों लोग जब शहर से गांव की ओर लौटे तो उनके सामने भूख से लड़ने के लिए रोजगार की आवश्यकता थी उस दौर में मनरेगा ने उन्हें रोजगार दिया।मनरेगा का ऑडिट करने का अधिकार मनरेगा कर्मियों के हाथ में दिया गया,सोशल ऑडिट से लोगों का विश्वास कायम हुआ। गांधी जी की सोच अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के विकास का था मनरेगा से यह पूरा हो रहा था इसलिए यूपीए सरकार ने इस कानून को महात्मा गांधी के नाम पर रखा।नये कानून में योजनाएं और जगह केंद्र सरकार तय करेगी,मजदूरों को कम मांगने का अधिकार नए कानून में नहीं है,नए कानून में ठेकेदारों से काम कराने का प्रावधान किया गया जबकि मनरेगा में ऐसा नहीं था।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान मनरेगा का बजट हर साल बढ़ता रहा जबकि भाजपा सरकार मनरेगा के बजट में कटौती करती रही है। मनरेगा में व्यवस्था है कि कोई मजदूर अगर काम मांगता है तो सरकार को उसे काम देना होगा और इसके लिए फंड मुहैया कराना होगा। मनरेगा योजना में यूपीए सरकार ने केंद्र और राज्यों का अंशदान 90ः10 का प्रावधान किया था, इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता था वर्तमान सरकार ने 60ः40 का निर्धारण किया है जिससे कई राज्यों की आर्थिक कमर टूट जाएगी। मनरेगा में मजदूर काम किसी भी वक्त मांग सकते थे लेकिन वर्तमान कानून में केंद्र सरकार ने साल के 2 महीने काम पर प्रतिबंध लगा दिया है। गैर भाजपा शासित राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास दर काफी तेजी से गिरेगी, योजनाओं के चयन में केंद्र सरकार पर निर्भरता से पूरी तरह गैर भाजपा शासित राज्य उपेक्षित रहेंगे।

विधायक दल नेता प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जनता के लिए लायी गयी सभी सुरक्षा कानून को बदलने का प्रयास कर रही है खाद्य सुरक्षा कानून को भी बदलने का प्रयास किया गया था। यदि कृषि के तीनों काले कानून वापस नहीं होते तो खाद्य सुरक्षा कानून भी समाप्त होता।भाजपा जिस तरह से सभी अधिकार छीन रही है इस तरह एक दिन वोट का अधिकार भी छिनेगी, लोकतंत्र को जिंदा रखने का जो माध्यम वोट का अधिकार है उसे भी नरेंद्र मोदी एसआइर के माध्यम से समाप्त करना चाहती है।

कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने कहा कि नरेंद्र मोदी में निर्णय लेने की क्षमता नहीं है हर बार अदूरदर्शी निर्णय लेते हैं और कांग्रेस द्वारा विरोध करने के बाद उसे बदलते हैं। कांग्रेस ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने के लिए मनरेगा कानून दिया।कांग्रेस  द्वारा दिए हर कानून को बदलने का काम मोदी सरकार कर रही है, यह देश की अर्थव्यवस्था पर चोट है।विरोध के बाद कृषि कानून को वापस लेना जातिगत जनगणना करने की घोषणा कांग्रेस की देन है क्योंकि कांग्रेस जनमुद्दों से जुड़ी रहती है। देश को तोड़ने बिखरने की कोशिश करने वाले नरेंद्र मोदी को देश की आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करेगी।

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि आजाद भारत के पहले आतंकवादी नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या की 18 दिसंबर 2025 को मोदी सरकार ने गांधी जी के नाम की हत्या कर दी।कायर मोदी सरकार अपनी कुंठा के कारण स्वतंत्रता सेनानियों के नाम के अपमान का हर मौका ढूंढती हैं क्योंकि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके पूर्वजों का कोई योगदान नहीं था। इसी कुंठा में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के नाम से भाजपा को चिढ़ है,भाजपा ने सोची रणनीति के तहत भगवान राम का नाम लाया है भाजपा को भगवान राम का दुरुपयोग करने की आदत है इसका खामियाजा उसे भुगतना होगा।

वित्त मंत्री डॉ राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम अचानक नहीं बदला गया बल्कि महात्मा गांधी के विचारों को इस देश के लोगों के जेहन से मिटाने के लिए रखा  है ताकि भारत में हिंदुवाद के विचारों को भाजपा मजबूत कर सके और इसका लाभ भाजपा को हो।यह सहयोग नहीं बल्कि भाजपा शोधकर्ताओं द्वारा शोध करके खोजा गया नाम है।यह योजना उन राज्यों को कमजोर करने की साजिश है जहां भाजपा की सरकार नहीं है।पूरे भारत में 12 करोड़ निबंधित मजदूर है इन्हें अगर 125 दिन रोजगार दिया जाए तो कुल राशि 3 लाख 80 हजार करोड़ रुपये होगी भारत सरकार का मनरेगा का बजट सिर्फ 80 हजार करोड़ रुपए है, मोदी जी बताएं कि बाकी की राशि वह कहां से लाएंगे। इस नई योजना से उत्तर पूर्व के राज्य झारखंड छत्तीसगढ़ असम लद्दाख जैसे छोटे राज्यों में नई योजना फेल हो जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि मोदी सरकार को कोई कानून लाने से पहले उस वर्ग को विश्वास में लेना चाहिए जिसके लिए कानून लाया जा रहा है,जबरन कानून थोपने से उसे वापस लेना होगा जैसा कृषि बिल में हुआ भाजपा ने हर कौम को कुचला है।भाजपा के शासनकाल में मणिपुर में बेटियों के साथ बलात्कार हुआ भाजपा सरकार के मंत्रिपुत्र ने किसानों को कुचला लेकिन मोदी जी के मुख से संवेदना के शब्द नहीं निकले।मनरेगा से गांव के मजदूरों की आर्थिक उन्नति हुई पलायन में कमी आयी थी। ग्रामीण क्षेत्रों को हासिये पर धकेलने की तैयारी मोदी सरकार कर रही है।

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि राज में वाटरशेड,बिरसा हरित ग्राम योजना अबुआ आवास सहित कई योजना मनरेगा से जुड़ी हुई है,पिछले 11 वर्षों से देश में औसतन मनरेगा के तहत 45 से 50 दिन का काम लोगों को मिला है,125 दिन का काम देने का वादा सिर्फ भुलावा है।मनरेगा पर किया गया हमला गरीबों के पेट पर लात मारना है हम इसके विरोध में संघर्ष करेंगे।

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि मनरेगा का मूल उद्देश्य पलायन रोकना,गांव के लोगों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना,आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने का था।यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं बल्कि कानून में बदलाव कर पूरी व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर दिया गया है जिसका प्रभाव निश्चित रूप से गांवों पर पड़ेगा, पलायन में तेजी से वृद्धि होगी।जब मनरेगा का बजट घटा दिया गया है तो 125 दिन की गारंटी किस आधार पर मोदी जी दे रहे हैं। सभा का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने की। विशिष्ठ आमंत्रित अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य ज्यां द्रोज उपस्थित थे। 

सभा को संबोधित करने वालों में मुख्य रूप से सांसद कालीचरण मुंडा, राजेश ठाकुर, प्रदीप बलमुचू, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, फुरकान अंसारी, अनादि ब्रह्म, विधायक भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोन्गाडी, अनूप सिंह, सरेश बैठा, निशात आलम, ममता देवी, सोनाराम सिंकू, रामचन्द्र सिंह, स्वेता सिंह,  बन्ना गुप्ता, केएन त्रिपाठी, राकेश सिन्हा, सतीश पॉल मुंजनी, रवीन्द्र सिंह, शमशेर आलम, ज्योति सिंह मथारू, जयशंकर पाठक, संजय लाल पासवान, राजीव रंजन प्रसाद, अमूल्य नीरज खलखो, अशोक चौधरी सुरेन्द्र सिंह, आलोक दूबे, कुमार राजा, सोनाल शांति, कमल ठाकुर, सोमनाथ मुंडा, राकेश किरण महतो, सुनील सिंह, सतीश केडिया, परविन्द्र ंिसह, शान्तनू मिश्रा आभा सिन्हा, गुंजन सिंह,केदार पासवान,मंजूर अंसारी, श्यामल किशोर सिंह, संजय मुन्नम, सुधीर चन्द्रवंशी अरूण साहु, निरंजन पासवान, जगदीश साहु, महेश भगत,  दुबे चटर्जी, धमेन्द्र सोनकर, हुसैन खान, जितेन्द्र त्रिवेदी, इन्दिरा तुरी, सुन्दराी तिकी, मंेरी तिकी, नीेतुदेवी, रब्बानी, सहित हजारो कांग्रेसजन एवं मनरेगा मजदूर शामिल थे। 

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