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गांव,गरीब और किसानों के लिए कुछ करने पर कांग्रेस के पेट में दर्द होने लगता हैः आदित्य साहू

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द फॉलोअप डेस्क

प्रदेश भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू ने कहा है कि गांव, गरीब, किसान और मजदूरों के लिए कुछ करने पर कांग्रेस पार्टी के पेट में दर्द होने लगती है। उन्होंने कहा कि मनरेगा लूट और भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया था। इसलिए केंद्र की भाजपा सरकार को नया कानून बनाना पड़ा, जो मजदूरों के हित में है। खूंटी जिले में 24 करोड़ के गबन उजागर होने पर कैसे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को जेल जाना पड़ा, यह इसके लूट और भ्रष्टाचार का नमूना है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में मनरेगा योजना में 193.67 करोड़ रुपए का गबन दर्ज किया गया। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में पश्चिम बंगाल के 19 जिलों सहित 23 राज्यों की निगरानी में कागजों पर ऐसे कार्य दिखाए गए जिसका जमीन पर अस्तित्व ही नहीं था। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद की अवधि में केवल 7.61% परिवारों ने 100 दिन का रोजगार पूरा किया। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में 11 वर्षों में बहुत प्रयास किए। जिसके कारण कुछ साकारात्मक परिणाम मिले।महिलाओं की भागीदारी बढ़ी,सक्रिय श्रमिकों की संख्या 12.11 करोड़ पहुंच गई। 99% तक ई भुगतान के बावजूद डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। आदित्य प्रसाद साहु आज मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे।

आदित्य साहु ने कहा कि मनरेगा में जारी लूट-खसोट को रोकने के लिए ही नए अधिनियम की आवश्यकता पड़ी। नया अधिनियम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ( ग्रामीण)विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए ग्रामीण श्रमिकों को पहले 100 दिन के बदले अब 125 दिन के कार्य दिवस की गारंटी देता है। इसमें मुख्यतः चार बिंदुओं पर फोकस किया गया है। इस अधिनियम में अनेक बिखरे हुए श्रेणियों की जगह चार श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिसमें जल संरक्षण जो आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, से संबंधित निर्माण , ग्रामीण बुनियादी संरचना का निर्माण जिसमें सड़कों का निर्माण शामिल है, जो गांव को बाजार से जोड़ता है, वैसे निर्माण जिसमें रोजगार का सृजन होता है। इसमें भंडारण से संबंधित निर्माण कार्य शामिल हैं और बदलते पर्यावरण संकट की दृष्टि से निर्माण, जिससे मौसमी प्रभाव को कम किया जा सके। जैसे मिट्टी के कटाव को रोकना, जल संरक्षण, बाढ़ से बचाव जैसे कार्य शामिल हैं। यह अधिनियम अधिक रोजगार, पारदर्शिता, प्लानिंग और जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। इस अधिनियम में एआई आधारित धोखाधड़ी की पहचान की व्यवस्था की गई है। केंद्र और राज्य स्तरीय निगरानी समिति की व्यवस्था। जीपीएस मोबाइल आधारित निगरानी की व्यवस्था,साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण,प्रत्येक पंचायत में वर्ष में दो बार योजनाओं की सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि इस अधिनियम में किसान और श्रमिक दोनों को लाभ की दृष्टि से ध्यान रखा गया है। वर्ष में 60 दिन नो वर्क अवधि। क्योंकि कृषि कार्य के समय मजदूर कृषि कार्य में शामिल रहते हैं। कृषि कार्य में मजदूरों को मजदूरी भी ज्यादा मिलती है साथ ही किसानों को समय पर मजदूर भी मिल जाते हैं। बाकी वर्ष के 300 दिन में 125 दिन काम की गारंटी दी गई है। काम नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के केंद्र और राज्य सरकार का अनुपात 60:40 है। योजना में राम शब्द आ रहा है इससे कांग्रेस को परेशानी हो रही है। हालांकि मनरेगा का नाम बदलने के औचित्य को वह जस्टिफाई नहीं कर सके। इतना भर कहा कि कांग्रेस भी नाम बदलती रही है। भाजपा कार्यकर्ता जनता को नए अधिनियम की खूबियों को जनता के बीच लेकर जाएंगे। कांग्रेस के दुष्प्रचार का पर्दाफाश करेंगे। आगामी 8 से 10 जनवरी तक भाजपा कार्यकर्ता सभी मंडलों में जी राम जी योजना की विशेषताओं को बताएंगे। जनता को  कांग्रेस पार्टी के दुष्प्रचार के खिलाफ जागरूक करेंगे। प्रेसवार्ता में मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक,प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा और रमाकांत महतो भी उपस्थित थे।

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