द फॉलोअप, रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रविवार को रांची स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में संगठनात्मक नियुक्तियों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
प्रेस वार्ता में झारखंड प्रभारी के. राजू और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि पार्टी राज्य में विभिन्न बोर्डों, निगमों और बीस सूत्री कार्यक्रम समितियों में कांग्रेस कोटे से होने वाली नियुक्तियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की अध्यक्षता में एक चयन समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है।
पार्टी के अनुसार चयन समिति नियुक्तियों के लिए ऐसे नामों पर विचार करेगी जिन्होंने लंबे समय तक संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई हो। साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के अलावा क्षेत्रीय एवं सामाजिक संतुलन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। समिति की अनुशंसाओं को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

झारखंड में SIR 15 दिन बढ़ाने की मांग
इस दौरान कांग्रेस विधायक दल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत गणना प्रपत्र जमा करने की समय-सीमा कम से कम 15 दिन बढ़ाने की मांग भी की। कांग्रेस का कहना है कि राज्य में भारी बारिश, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, तकनीकी समस्याओं और बड़ी संख्या में लंबित डिजिटलीकरण के कारण अनेक पात्र मतदाता सूची से बाहर होने के खतरे में हैं।
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पंचायत और मतदान केंद्र स्तर पर विशेष सहायता शिविर लगे
पार्टी नेताओं ने दावा किया कि शहरी क्षेत्रों में भी गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की गति अपेक्षा से काफी धीमी है और बड़ी संख्या में मतदाता अभी तक सत्यापन प्रक्रिया से नहीं जुड़ पाए हैं। प्रवासी मजदूरों, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों के मतदाताओं को भी समय पर प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से समय-सीमा बढ़ाने के अलावा पंचायत और मतदान केंद्र स्तर पर विशेष सहायता शिविर लगाने तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली ग्राम सभाओं के माध्यम से मतदाता सूची संबंधी जागरूकता अभियान चलाने की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि पर्याप्त समय मिलने से वास्तविक मतदाताओं का नाम सूची में सुरक्षित रहेगा और बाद में दावे एवं आपत्तियों की संख्या भी कम होगी।