द फॉलोअप, रांची
राज्य सरकार और JSSC के चक्कर में झारखंड के युवाओं का कैरियर किस प्रकार बर्बाद हो रहा है, इसका उदाहरण है सीनियर ऑडिटर के पद पर नियुक्ति का विज्ञापन। कितनी बार इसका विज्ञापन निकला और रद्द हुआ और अंततः कैसे पोस्ट का नाम बदल कर अभ्यर्थियों का कैरियर बर्बाद कर दिया गया, यह राज्य की नियुक्ति प्रक्रिया की बदहाली की कहानी कह रहा है। और इस कहानी में कैसे युवाओं के उम्र और उसका मेहनत बर्बाद हो रहा है,दुखद और सोचनीय पहलू बन गया है।

2015 में जेएसएससी ने संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा-2015 का विज्ञापन निकाला। इस विज्ञापन में कई तरह के टेक्निकल और नन टेक्निकल पद थे, जिसके लिए प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित की जानी थी। उसमें सीनियर ऑडिटर के भी पद थे। बाद में कतिपय कारणों से इस प्रतियोगी परीक्षा का विज्ञापन रद्द कर दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय फिर से जेएसएससी ने विज्ञापन निकाला। लेकिन इस विज्ञापन में टेक्निकल पदों हटा दिया गया। केवल नन टेक्निकल पदों के लिए ही विज्ञापन निकाला गया। फिर इस विज्ञापन को भी रद्द कर दिया गया। इसके बाद जेएसएससी ने फिर 2022 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया। इसमें सीनियर ऑडिटर के भी पद थे। अभ्यर्थियों ने कोर्ट की शरण में जाकर उम्र सीमा में छूट का लाभ लिया। अर्थात 2015 के विज्ञापन में कट ऑफ डेट 2010 को आधार बनाया गया।लेकिन बाद में यह विज्ञापन भी रद्द हो गया। कहानी यहीं खत्म नहीं होती है।

फिर 2023 में जब जेएसएससी ने टेक्निकल पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया तो उसमें सीनियर ऑडिटर के पद को हटा दिया गया। अर्थात 2015से सीनियर ऑडिटर पद के लिए तैयारी कर रहे युवा निराश हो गए। अब 2026 में जेएसएससी ने एक बार फिर टेक्निकल पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है। लेकिन इसमें सीनियर ऑडिटर पद को डिग्रेट करते हुए ऑडिटर कर दिया गया है। ऑडिटर के 145 पदों के लिए निकाले गए विज्ञापन के आधार पर अब वे अभ्यर्थी इसमें शामिल नहीं हो सकते हैं जो 2015 से तैयारी करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं 2022 के विज्ञापन के बाद आवेदन करने वाले अभ्यर्थी भी इसमें शामिल नहीं हो सकते हैं। क्योंकि 2026 के विज्ञापन में उम्र सीमा के लिए एक अगस्त 2025 का कट ऑफ डेट रखा गया है। अब फर्ज कीजिए कि 2015 में जिन अभ्यर्थियों ने अंकेक्षक पद के लिए आवेदन किया था और उस समय से तैयारी कर रहे थे, लेकिन 11 वर्षों में सरकार और जेएसएससी ने परीक्षा नहीं ली तो इसमें उनका क्या कसूर है। लेकिन उम्र सीमा पार कर जाने के कारण वे सरकारी व्यवस्था के कोप भाजन बनने को मजबूर हैं। ऐसे छात्रों ने सरकार के विभिन्न स्तरों पर उम्र सीमा में छूट दिए जाने का आग्रह किया है। पत्र लिखा है। मिन्नत की है। लेकिन कहीं कोई सुनने वाला नहीं है।
