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सूर्या नर्सिंग होम में महिला की मौत पर हाईलेवल जांच, DC ने गठित की त्रिस्तरीय समिति

सूर्या नर्सिंग होम में महिला की मौत पर हाईलेवल जांच, DC ने गठित की त्रिस्तरीय समिति

द फॉलोअप डेस्क
गोड्डा जिले के नहर चौक स्थित सूर्या नर्सिंग होम में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। 15 सितंबर 2026 को समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर का त्वरित संज्ञान लेते हुए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी लोकेश मिश्रा ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए त्रिस्तरीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति घटना से जुड़े सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच करेगी। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर के अनुसार, सूर्या नर्सिंग होम में गर्भपात के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने के बाद कंचन देवी, पति अशोक कुमार की मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने नर्सिंग होम प्रबंधन और वहां कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का आरोप है कि महिला को समय पर समुचित इलाज उपलब्ध नहीं कराया गया और स्थिति बिगड़ने के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर करने में भी अनावश्यक देरी की गई।


मामले की जांच करेगी त्रिस्तरीय समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच का निर्णय लिया है। इसके लिए गठित समिति में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), गोड्डा, सिविल सर्जन, गोड्डा और अंचल अधिकारी (CO), गोड्डा को शामिल किया गया है। समिति को पूरे मामले की निष्पक्ष, विस्तृत और तथ्यपरक जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। जांच समिति सूर्या नर्सिंग होम, नहर चौक का स्थल निरीक्षण करेगी। इसके साथ ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। घटना के समय नर्सिंग होम में उपलब्ध चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीज को दी गई उपचार प्रक्रिया की भी जांच होगी। महिला को उपलब्ध कराए गए उपचार, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े अभिलेखों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।


लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों की होगी जांच
जांच समिति सूर्या नर्सिंग होम के वैध पंजीकरण और अनुज्ञप्ति यानी लाइसेंस की वैधता की भी जांच करेगी। संस्थान के पंजीकरण और लाइसेंस से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा नर्सिंग होम में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की शैक्षणिक योग्यता की भी जांच होगी। जांच के दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के अनिवार्य मेडिकल पंजीकरण और अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्रों का भी सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही घटना के दौरान महिला की स्थिति बिगड़ने और उसे सदर अस्पताल रेफर किए जाने से जुड़ी परिस्थितियों तथा रेफर करने में लगे समय की भी जांच की जाएगी।


दो दिनों में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी लोकेश मिश्रा ने जांच समिति के सभी सदस्यों को पूरे मामले की निष्पक्ष, विस्तृत और तथ्यपरक जांच करने का निर्देश दिया है। समिति को स्पष्ट मंतव्य के साथ अपनी जांच रिपोर्ट दो दिनों के भीतर अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में अनिवार्य रूप से सौंपने को कहा गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय की जाएगी और कानून के अनुरूप कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में निर्धारित मानकों और वैधानिक प्रावधानों का पालन सभी संबंधित संस्थानों के लिए अनिवार्य है। मरीजों की सुरक्षा और उन्हें समुचित उपचार उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

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