द फॉलोअप डेस्क
सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद देश भर में सियासी बयानबाजी तेज हो गयी है, दरअसल पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया को पड़ोसी राज्यों के जज के निगरानी में संम्पन करवाने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है जिसके बाद विपक्षी दलों के द्वारा केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा जा रहा है, इसी क्रम में झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्देश को लेकर कहा कि मंगलवार को एक बहुत बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आया है. जिस प्रकार से चुनाव आयोग अपने फैसले से लोकतंत्र में सवाल बन कर उभरा है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है, रांची स्थित झामुमो के कैम्प कार्यालय में एक संवाददाता सम्मलेन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई लंबित मामला बहुत दिनों तक चलता है तभी अनुच्छेद 142 का उपयोग सर्वोच्च न्यायालय करता है।

इस प्रकार के फैसले बड़ा नाजिर पेश करते हैं पहली बार SIR की जो त्रुटियां बंगाल सरकार ने बताया उससे यह साफ़ होता है कि ये लड़ाई पॉलिटिकल थॉट प्रोसेस से नही लड़ी जाती ,सुप्रीम कोर्ट ने बता दिया की SIR जुडिशियल निगरानी के तहत होगा। अप्रैल से झारखंड में भी SIR की प्रक्रिया शुरू होगी जिसमें विशेष तौर पर बांग्ला भाषी और अल्पसंख्यक वर्ग को लेकर जो इनकी मंसूबा है इसको हम कभी भी सफल होने नही देंगे, सुप्रियो भट्टाचार्य ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में जो मछली भात खाता है और बांग्ला बोलता है उसको आज दिल्ली छोड़ना पड़ रहा है लेकिन झारखंड में भाजपा और उसके सहयोगी भारतीय चुनाव आयोग को सचेत कर देना चाहते हैं क्यों की हम यहाँ ऐसा कुछ नही होने देंगे.

वहीं उन्होंने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को ED के समन अवहेलना मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ED को आज सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ने का काम किया है, सुप्रिमे कोर्ट ने कहा ED के पास यदि कोई ठोस जानकारी है तो काम करे ना की एक दल और एक सरकार के तरफ चल जाए।