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केंद्र की कोशिश है कि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी समय पर नहीं दी जाए: वित्तमंत्री राधा कृष्ण किशोर

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रांची
बजट सत्र के दौरान राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र की कोशिश है कि केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी समय पर न दी जाए या उसमें कटौती की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी वित्तीय व्यवस्था करेगी कि केंद्र के आगे हाथ फैलाने की जरूरत न पड़े। वित्त मंत्री ने कहा कि मूल बजट पेश करने के दिन वे विस्तार से बताएंगे कि झारखंड के साथ किस तरह आर्थिक असहयोग किया जा रहा है और किस प्रकार राज्य को दबाने की कोशिश हो रही है।
मंत्री ने तृतीय अनुपूरक बजट की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 6450 करोड़ रुपये की राशि में अधिकतर हिस्सा कमिटेड लायबिलिटी को पूरा करने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2026 तक 90 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च कर ली जाएगी। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में राशि खर्च करना संभव है और सरकार इसके लिए तैयार है।


ऋण को लेकर विपक्ष पर पलटवार
वित्त मंत्री ने विपक्ष की नेता नीरा यादव के कटौती प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि झारखंड ने FRBM एक्ट के तहत मात्र 2.2 प्रतिशत ही ऋण लिया है, जो राष्ट्रीय सीमा से काफी कम है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि भाजपा शासित बिहार में यह आंकड़ा 6.6 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 5 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि FRBM एक्ट के अनुसार कोई भी राज्य अपनी जीडीपी का अधिकतम 3 प्रतिशत तक ही ऋण ले सकता है। इस आधार पर झारखंड अभी भी लगभग 8000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने की स्थिति में है।


विपक्ष का सरकार पर हमला
विधानसभा में विधायक कुमार उज्जवल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार मूल बजट की 20 से 25 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर पाई, इसलिए बार-बार अनुपूरक बजट लाना पड़ा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भारी बारिश से किसानों को नुकसान हुआ, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। धान क्रय केंद्रों से अनाज का उठाव नहीं हो रहा, जिससे किसान कम दाम पर धान बेचने को मजबूर हैं।
कुमार उज्जवल ने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों की लागत से कई जिलों में भवन बनकर तैयार हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा। सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 108 एंबुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध नहीं होती और बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
पर्यटन विकास को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि भद्रकाली मंदिर सहित कई परियोजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं।
बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच वित्तीय प्रबंधन, ऋण सीमा और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है।


 

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