द फॉलोअप डेस्क
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में घंटी आधारित कार्यगत शिक्षकों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू ने विधानसभा में सोमवार को करारा जवाब दिया। यह जवाब उन्होंने विधायक प्रदीप यादव के सवाल पर दिया। सुदिव्य सोनू ने कहा कि विभाग ने तकनीकी रूप से नियुक्ति प्रक्रिया में कोई गलती नहीं की है। उनका कहना था कि सरकार चाहती है कि खुली प्रतिस्पर्धा में अच्छे शिक्षक आएं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को न्यायालय जाना है, वे जा सकते हैं। जिन्हें लगता है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है, उन्हें न्यायालय जाने का अधिकार है, लेकिन राज्य सरकार लेक्चररों की नियुक्ति में कहीं भी प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं कर रही है।

प्रदीप यादव ने कहा था कि सरकार ने नीड बेस्ट लेक्चररों को जो अंक आधारित प्राथमिकता दी है, वह बहुत कम है, जिसके कारण वे आवेदन ही नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है, लेकिन हाईकोर्ट का आदेश आने पर नियम लागू हो जाएगा। इस पर सुदिव्य सोनू ने कहा कि जिनको न्यायालय जाना है, वे जाएं। प्रदीप यादव द्वारा बिहार और हरियाणा में हुई बहाली का उदाहरण देने पर सुदिव्य सोनू ने कहा कि जरूरी नहीं कि बिहार के नियम झारखंड में भी लागू किए जाएं। अगर ऐसा होता, तो बिहार से झारखंड के अलग होने की जरूरत ही क्या थी।
