द फॉलोअप डेस्क
विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है और शिक्षक को इस मंदिर का पुजारी, लेकिन जब यही शिक्षक अपराधी बन जाएं तो समाज को हिला देने वाली घटना घटित होती है।" ऐसी ही एक दिल दहला देने वाली घटना गढ़वा जिल से सामने आई है, जिसमें परियोजना प्लस टू उच्च विद्यालय बड़गढ़ की शिक्षिका द्रौपदी मिंज ने एक छात्रा की पिटाई कर दी, जिसके कारण छात्रा की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, विद्यालय में कक्षा 10 की छात्रा दिव्या कुमारी ने स्कूल में जूते की जगह चप्पल पहनकर आना मुनासिब समझा था। यह बात शिक्षिका द्रौपदी मिंज को इतनी गुस्से में ले आई कि उन्होंने दिव्या को सबके सामने बुरी तरह से पीट दिया। इस अत्यधिक शारीरिक प्रताड़ना के कारण दिव्या गंभीर रूप से घायल हो गई और वह कोमा में चली गई। परिजनों ने दिव्या का इलाज विभिन्न बड़े अस्पतालों में करवाया, लेकिन दुर्भाग्यवश वह अपनी जान नहीं बचा पाई। रविवार को दिव्या की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। मौत की खबर फैलते ही, गांववाले और परिजन आक्रोशित हो गए और शव के साथ सड़क को जाम कर दिया।
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परिजनों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए सड़क पर टायर जलाए और कहा कि हमे सिर्फ न्याय चाहिए और कुछ नहीं। मृतका छात्रा के परिजनों ने कहा, "हमने अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए भेजी था, लेकिन इन लोगों ने तो हमारी बेटी की हत्या कर दी। आखिर उसकी गलती क्या थी? क्या एक चप्पल पहनना अपराध था?"
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों तथा ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन सभी अपनी मांग पर अडिग रहे। वे चाहते थे कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। बीडीओ ने कहा, "हम मामले की पूरी जांच करेंगे, और जो भी इसके पीछे होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" वहीं, पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा, "हमें इस संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ है और हम मामले की जांच कर रहे हैं। जल्द ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" दिव्या की मौत ने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक छोटी सी गलती के लिए शिक्षक को छात्रा पर हाथ उठाने का अधिकार होता है? क्या इस तरह के मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
