द फॉलोअप,
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के असमय निधन से झारखंड में एक बार फिर उप चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। अलग झारखंड राज्य बने 26 वर्ष होने वाले हैं। इस तरह 26 वर्षों के भीतर झारखंड में यह 22 वां उप चुनाव होगा। इनमें कुछ उप चुनाव विधायकों-मंत्रियों के असमय निधन के कारण हुआ। कुछ विधायकों द्वारा अलग अलग कारणों से दिए गए इस्तीफे की वजह से हुआ तो कुछ विधायकों को कोर्ट से सजा मिलने के कारण उनकी सदस्यता चली गयी। इन वजहों से उप चुनाव हुए। अब 6 सितंबर को युवा तुर्क और होनहार मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के कारण गिरिडीह विधानसभा का उप चुनाव सुनिश्चित हो गया है। मालूम हो कि संवैधानिक प्रावधान के तहत रिक्ति के छह महीने के भीतर निर्वाचन आयोग को उप चुनाव कराने की बाध्यता है। इस कारण झारखंड में फरवरी 2027 तक उप चुनाव अंतिम समय सीमा है। लेकिन अभी से राजनीतिक दलों के बीच उप चुनाव को लेकर खुसफुसाहट शुरू हो गयी है। यह धीरे धीरे आने वाले दिनों में समय के साथ जोर पकड़ने की उम्मीद है। लेकिन झामुमो के भीतर अभी उप चुनाव को लेकर कोई चर्चा नहीं है। सभी यह मान और समझ कर चल रहे हैं कि पार्टी सुदिव्य सोनू के परिवार के साथ मुख्यमंत्री का जो नजदीकी और आत्मीय रिश्ता है, उससे उनके परिवार के ही किसी सदस्य को उम्मीदवार बनना तय माना जा रहा है। उसमें उनकी पत्नी श्वेता शर्मा प्रमुख हैं। बहुत अधिक माथापच्ची की गुंजाइश नहीं है।

अभी सीएम के पास रहेगा सोनू को आवंटित विभाग
आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू को आवंटित विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री के ही पास रहेगा। इस संबंध में मंगलवार को कार्यालय खुलने के बाद मंत्रिमंडल समन्वय विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। मालूम हो कि रामदास सोरेन के निधन के बाद से उनके पास रहे स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग मुख्यमंत्री के ही जिम्मे है। अब सोनू को आवंटित नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा पर्यटन कला संस्कृति एवं खेलकूद विभाग भी मुख्यमंत्री के पास हो जाएगा। यहां मालूम हो कि राज्य मंत्रिपरिषद में रामदास सोरेन के निधन से एक बर्थ पहले से खाली था। अब मंत्री पद की दूसरी सीट भी खाली हो गयी है।

2001 में रामगढ़ में हुआ था पहला उप चुनाव
झारखंड में रामगढ़ उप चुनाव पहला था। 2000 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई के शब्बीर अहमद कुरैशी उर्फ भेड़ा सिंह विधायक चुने गए थे। उनके निधन के बाद यह सीट खाली हो गयी थी। इधर 15 नवंबर 2000 को बाबूलाल मरांडी झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लिए थे। लेकिन उस वक्त वह सांसद और केंद्र में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री थे। उन्हें मुख्यमंत्री पद पर रहने के लिए छह महीने के भीतर चुनाव जीत कर विधायक बनना अनिवार्य था। इसलिए उन्होंने रामगढ़ से चुनाव लड़े और जीते।
सीएम पद पर रहने के लिए अर्जुन मुंडा और गुरुजी भी लड़े उप चुनाव
2008 में तमाड़ से जदयू विधायक रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने हत्या कर दी। यह सीट खाली हो गयी। उधर सितंबर 2008 में शिबू सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्हें भी किसी विधानसभा क्षेत्र से जीतना जरूरी था। उन्होंने जनवरी 2009 में हुए तमाड़ विधानसभा उप चुनाव लड़े। हालांकि गुरुजी हार गए और यहां से जदयू के टिकट पर राजा पीटर चुनाव जीत गए। इसी तरह 2009 के लोकसभा चुनाव में अर्जुन मुंडा भाजपा की टिकट पर जमशेदपुर से चुनाव जीत गए। 2010 के अंत में वह झारखंड के मुख्यमंत्री बनाए गए। उन्हें भी संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतना अनिवार्य था। मुंडा ने अपने विश्वस्त मंगल सिंह सोय को खरसांवा से इस्तीफा दिलवा कर सीट खाली कराया। वहां से वे चुनाव लड़े और जीते। इसी तरह 2024 में कल्पना सोरेन के लिए सरफराज अहमद ने गांडेय की सीट खाली की थी। वहां हुए उप चुनाव में कल्पना सोरेन जीती भी।
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सजा होने पर सदस्यता गयी और इन सीटों पर चुनाव हुए
हत्या के एक मामले में सजा होने पर लोहरदगा से आजसू विधायक रहे कमल किशोर भगत की सदस्यता चली गयी। 2015 में यहां भी उप चुनाव हुआ और सुखदेव भगत चुनाव जीते। 2018 में फिर एक मामले में अदालत से सजा होने के कारण झामुमो के गोमिया से विधायक योगेंद्र प्रसाद की सदस्यता चली गयी। इस उप चुनाव में योगेंद्र प्रसाद की पत्नी बबीता देवी चुनाव जीत गयी। कुछ इसी तरह 2018 में कोर्ट से सजा होने के कारण सिल्ली से झामुमो विधायक अमित महतो की सदस्यता चली गयी। यहां भी उप चुनाव हुआ और उनकी पत्नी सीमा देवी चुनाव जीती। 2018 कई उप चुनावों का गवाह बना। कोलेबिरा विधायक एनोस एक्का की भी आय से अधिक संपत्ति मामले में कोर्ट से सजा होने के कारण चुनाव हुआ और वहां से कांग्रेस के नमन विक्सल कोंगारी चुनाव जीते। 2022 में भी इसी तरह की घटना हुई। मांडर से विधायक बंधु तिर्की को भी कोर्ट से सजा हुई और उनकी सदस्यता चली गयी। यहां हुए उप चुनाव में बंधु तिर्की की पुत्री शिल्पी नेहा तिर्की चुनाव जीते। फिर 2023 में सजा होने के कारण रामगढ़ से विधायक रही कांग्रेस विधायक ममता देवी की भी सदस्यता चली गयी। उप चुनाव में यहां से आजसू से चंद्रप्रकाश चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी चुनाव जीती।
वर्ष विधानसभा उपचुनाव क्यों हुआ? विजेता
2001 रामगढ़ सीबीआई विधायक भेड़ा सिंह के निधन से बाबूलाल मरांडी
2008 सिमरिया उपेंद्र नाथ दास की मृत्यु के बाद सीट खाली हुई रामचंद्र राम
2008/09 तमाड़ रमेश सिंह मुंडा की हत्या के बाद सीट खाली हुई गोपाल कृष्ण पातर
2011 खरसावां अर्जुन मुंडा को विधानसभा सदस्य बनना था अर्जुन मुंडा
2011 मांडू टेकलाल महतो के निधन के बाद जयप्रकाश भाई पटेल
2012 हटिया गोपाल शरण नाथ शाहदेव के निधन के बाद नवीन जायसवाल
2015 लोहरदगा कमल किशोर भगत की सदस्यता समाप्त होने के बाद सुखदेव भगत
2016 गोड्डा रघुनंदन मंडल के निधन के बाद अमित कुमार मंडल
2016 पांकी विदेश सिंह के निधन के बाद देवेंद्र कुमार सिंह
2017 लिट्टीपाड़ा डॉ अनिल मुर्मू के निधन के बाद साइमन मरांडी
2018 गोमिया योगेंद्र प्रसाद की सदस्यता समाप्त होने के बाद बबीता देवी
2018 सिल्ली अमित महतो की सदस्यता समाप्त होने के बाद सीमा देवी
2018 कोलेबिरा एनोस एक्का की सदस्यता समाप्त होने के बाद नमन विक्सल कोंगाड़ी
2020 दुमका हेमंत सोरेन बरहेट से भी जीते, दुमका छोड़ी बसंत सोरेन
2020 बेरमो राजेंद्र प्रसाद सिंह के निधन के बाद कुमार जयमंगल सिंह
2021 मधुपुर हाजी हुसैन अंसारी के निधन के बाद हफीजुल हसन
2022 मांडर बंधु तिर्की की सदस्यता समाप्त होने के बाद शिल्पी नेहा तिर्की
2023 रामगढ़ ममता देवी को सजा होने के बाद सुनीता चौधरी
2023 डुमरी जगरनाथ महतो के निधन के बाद बेबी देवी
2024 गांडेय सरफराज अहमद के इस्तीफे के बाद कल्पना सोरेन
2025 घाटशिला रामदास सोरेन के निधन के बाद सोमेश चंद्र सोरेन
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