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सिमडेगा के 12 हजार किसानों के उगाए आम अब यूरोप में बिकेंगे, 85 टन एक्सपोर्ट का लक्ष्य

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सिमडेगा 
सिमडेगा जिला अब सिर्फ बेहतरीन हॉकी खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने वर्ल्ड क्लास आमों के लिए भी दुनिया भर में मशहूर हो रहा है। यहां के किसानों के उगाए आम अब विदेशों में बेचे जा रहे हैं। लंदन में अपनी धाक जमाने के बाद, अब ये आम पेरिस और बर्लिन जैसे यूरोपीय शहरों के बाजारों में पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने इस साल बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत करीब 85 टन आम विदेश भेजने का लक्ष्य रखा है।DC कंचन सिंह ने बताया पूरे 85 टन आम विदेश भेजने का टारगेट 
अभी तक दुनिया जानती थी कि सिमडेगा के मैदानों से निकले धुरंधर खिलाड़ी हॉकी की गेंद को सात समंदर पार पहुंचाते हैं। लेकिन थोड़ा ठहरिए! सिमडेगा के सिर्फ हॉकी खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि वहां के खेतों के आम भी वर्ल्ड क्लास में शामिल हो चुके हैं, जिनकी कीमत अब डॉलर और पाउंड में मुस्कुरा रही है। यानी जिले का आम अब लोकल नहीं रहा, वह शुद्ध रूप से ग्लोबल वीआईपी बन चुका है। पहले तो इन आमों ने यूनाइटेड किंगडम का टिकट कटाया और दो खेप आम लंदन क्या गई, लंदन वाले तो सिमडेगा के किसानों के फैन हो गए। यूके में अपना जलवा बिखेरने के बाद अब ये आम यूरोप के बाकी देशों की सैर पर निकल रहे हैं। मतलब साफ है कि लंदन ने तो स्वाद चख ही लिया, अब पूरा पेरिस और बर्लिन भी सिमडेगा का स्वाद चखेगा। DC कंचन सिंह ने बताया कि इस बार हल्का-फुल्का नहीं, बल्कि पूरे 85 टन आम विदेश भेजने का टारगेट है। जिले के 10 हजार हेक्टेयर ज़मीन पर बैठी है तगड़ी आम की फैक्ट्री
इस इंटरनेशनल टूर के पीछे असली मास्टरमाइंड हैं सिमडेगा के 12 हजार से ज्यादा किसान और मनरेगा की बिरसा हरित ग्राम योजना। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 10 हजार हेक्टेयर की जमीन पर ऐसी तगड़ी आम की फैक्ट्री बैठी कि जिला प्रशासन भी सोच में पड़ गया कि इतने आमों का करें क्या। लोकल बाज़ार में तो आम की बाढ़ आ जाएगी। बस फिर क्या था। जिला प्रशासन ने कमर कसी और जेएसएलपीएस की महिला समूहों को कमान सौंप दी। दीदीयों ने आमों को ऐसा चकाचक तैयार किया, ऐसी बढ़िया पैकेजिंग की कि बड़े-बड़े खरीदार लाइन लगाकर खड़े हो गए। एक्सपोर्ट का सारा जिम्मा एपीडा ने संभाला और सिमडेगा के आम सीधे एयरपोर्ट की तरफ दौड़ पड़े।

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