द फॉलोअप, जमशेदपुर:
Jharkhand News: कोल्हान से सबसे बड़े एमजीएम (MGM) अस्पताल में ब्रेन मलेरिया (Brain Malaria) से बच्चों की मौत (Child Deaths) का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले सात दिनों में इस गंभीर बीमारी से पीड़ित चार बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन बच्चे पूर्वी सिंहभूम जिले के अलग-अलग प्रखंडों के रहने वाले थे, जबकि एक सरायकेला-खरसावां जिले का निवासी था। मंगलवार को गोपालपुर निवासी सात वर्षीय राहुल जामूदा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह पिछले सात दिनों से वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा था। लगातार हो रही मौतों ने बच्चों में मलेरिया के गंभीर संक्रमण और समय पर इलाज की चुनौती को सामने ला दिया है।

सात दिनों से वेंटिलेटर पर था राहुल
एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केके चौधरी के अनुसार, राहुल सेरेब्रल मलेरिया से गंभीर रूप से पीड़ित था। परिजनों के मुताबिक, उसे करीब एक सप्ताह से तेज बुखार, सिरदर्द और लगातार उल्टी की शिकायत थी। स्थानीय स्तर पर इलाज कराने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद उसे एमजीएम अस्पताल लाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) में भर्ती किया। जांच में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि होने के बाद 21 अक्टूबर से उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।

बोड़ाम और डुमरिया के तीन बच्चों की भी मौत
पिछले सात दिनों में ब्रेन मलेरिया से जान गंवाने वाले अन्य बच्चों में बोड़ाम के मोहनपुर निवासी छह वर्षीय शकुंतला सबर, डुमरिया के झांयाडीह निवासी पांच वर्षीय प्रदीप मुर्मू और डुमरिया के ही बाकड़ाकोचा निवासी 13 वर्षीय शेखर मार्डी शामिल हैं। लगातार चार बच्चों की मौत से ग्रामीण इलाकों में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गयी है। ब्रेन मलेरिया मलेरिया का गंभीर रूप है, जिसमें संक्रमण मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। तेज बुखार के साथ बेहोशी, दौरे या मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण दिखने पर तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है। बच्चों में बीमारी की गंभीरता को देखते हुए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।