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वरिष्ठ पत्रकार संजय रंजन के पिता का निधन, पैतृक गांव में अंतिम संस्कार संपन्न

वरिष्ठ पत्रकार संजय रंजन के पिता का निधन, पैतृक गांव में अंतिम संस्कार संपन्न

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः 
वरिष्ठ पत्रकार और द फॉलोअप के संस्थापक सदस्य संजय रंजन के पिता यदुनंदन यादव का पैतृक गांव मानिकपुर (अरवल) में सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 की सुबह निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। उन्होंने सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर अंतिम सांस ली। उनके निधन पर पत्रकारिता, राजनीति और सामाजिक जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पिता के निधन की जानकारी साझा करते हुए संजय रंजन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा, “पापा नहीं रहे। सोमवार आज सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बीते 13 अक्टूबर की सुबह से वे अचेतावस्था में चले गए थे। 12 अक्टूबर की रात साढ़े दस बजे पापा से मेरी आखिरी बातचीत हुई थी। बहुत कुछ है जो लिखना चाहता हूं, लेकिन हमेशा लिखते रहने वाला यह हाथ आज कांप रहा है। ईश्वर मेरे पापा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।” संजय रंजन की इस भावुक अभिव्यक्ति से पिता को खोने का उनका दर्द साफ झलकता है। यदुनंदन यादव डाक विभाग से सेवानिवृत्त थे। वह पिछले कई दिनों से अचेतावस्था में थे। उनके निधन से परिवार में शोक का माहौल है। उनके पीछे भरा-पूरा परिवार है। संजय रंजन तीन भाइयों और दो बहनों वाले परिवार से हैं। यदुनंदन यादव का अंतिम संस्कार बिहार के अरवल जिले के मानिकपुर में किया गया। 


प्रदीप यादव और मिथिलेश ठाकुर ने जताया शोक
संजय रंजन के पिता के निधन पर कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पत्रकार संजय रंजन जी के पूज्य पिताजी के देवलोकगमन का दुखद समाचार अत्यंत मर्माहत करने वाला है। प्रदीप यादव ने ईश्वर से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा संजय रंजन और उनके पूरे परिवार को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। वहीं, झारखंड के पूर्व मंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता मिथिलेश ठाकुर ने भी यदुनंदन यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि द फॉलोअप के संस्थापक सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार संजय रंजन के पिताजी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि जीवन में पिता का साया सबसे बड़ा संबल होता है। उनका बिछड़ना ऐसा दुख है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं है। उन्होंने संजय रंजन और उनके समस्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। पिता का बिछड़ना जीवन की अपूरणीय क्षतिपिता केवल परिवार के मुखिया नहीं होते, बल्कि जीवनभर मार्गदर्शन देने वाले और हर मुश्किल में संबल बनने वाले व्यक्तित्व होते हैं। उनका स्नेह, अनुभव और आशीर्वाद जीवन की अनमोल पूंजी होते हैं। उनके जाने के बाद उनकी यादें ही परिवार का सहारा बनती हैं। यदुनंदन यादव के निधन से संजय रंजन के परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। इस दुख की घड़ी में पत्रकारिता, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग सोशल मीडिया के माध्यम से शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

Tags - Sanjay Ranjan The Followup Bereavement (loss of a parent) Senior Journalist Ranchi