द फॉलोअप, रांची
केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय एवं सहकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने देश में आरक्षण व्यवस्था पर कई टिप्पणियां की है। उन्होंने यह तो कहा ही कि देश में अभी भी जाति व्यवस्था मजबूत है। देश की आबादी का बड़ा हिस्सा एसटी, एससी और ओबीसी का है। एसटी-एससी की आबादी लगभगग 25 फीसदी और ओबीसी 52 फीसदी है। इन्हें केवल 49.9 फीसदी आरक्षण ही मिलता है। लेकिन शिड्युल कास्ट की बुद्धि अब जेनरल से कम नहीं है। किसी भी परीक्षा के मेरिट लिस्ट को देखें तो उसमें शिड्युल कास्ट के छात्रों का नंबर जेनरल कास्ट के छात्रों से मुश्किल से 2-3 नंबर ही कम रहता है। हालांकि उन्होंने शिड्युल कास्ट के बच्चों में भी मेरिट है, इसके पीछे के अभिप्राय को स्पष्ट नहीं किया।
अठावले ने यह भी जोड़ा कि सवर्णों के घरों में स्टडी रूम होता है। उनके बच्चों को अच्छा भोजन मिलता है और दलितों के बच्चे गांव के बाहर पोल के बल्ब के नीचे पढ़ते हैं। उनके पास भोजन, कपड़ा नहीं होता। जातीय व्यवस्था में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ आज भी भेदभाव किया जा रहा है। अगर जाति व्यवस्था समाप्त हो जाए तो वह भी आरक्षण का त्याग कर देंगे। अठावले शुक्रवार को रांची में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। देश में आरक्षण व्यवस्था खत्म करने की मांग पर अपना पक्ष रख रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति/ जनजाति के अधिकारियों का CR खराब किया जाता है। उनका प्रमोशन रोका जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर जाति को उसकी आबादी के अनुसार आरक्षण मिलना चाहिए।
.jpeg)