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15 साल के संघर्ष के बाद मां-बेटी को मिली नई उम्मीद, पुलिस ने थामा हाथ; बेटी की पढ़ाई का उठाया जिम्मा

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साहिबगंज
करीब 15 वर्षों से मुश्किल हालात में जिंदगी गुजार रही मां-बेटी के लिए साहिबगंज पुलिस की पहल उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। नगर थाना क्षेत्र के हबीबपुर स्थित सेंट्रल स्कूल मोहल्ले में रहने वाली रूबी सिन्हा और उनकी बेटी कृतिका को लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे वक्त में पुलिस प्रशासन ने आगे बढ़कर न सिर्फ उनके रहने की व्यवस्था कराई, बल्कि बेटी की पढ़ाई भी जारी रखने में सहयोग दिया।
शादी के बाद कथित प्रताड़ना का लगाया आरोप
रूबी सिन्हा के मुताबिक, करीब 15 वर्ष पहले उनकी शादी हबीबपुर निवासी मनोज कुमार वर्मा से हुई थी। शादी के कुछ वर्षों बाद से ही उन्हें कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। मामले को लेकर उन्होंने न्याय पाने के लिए न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन परिस्थितियों में स्थायी सुधार नहीं हो सका। रूबी का आरोप है कि उनकी बेटी कृतिका के साथ भी कथित दुर्व्यवहार हुआ और कम उम्र में उसकी शादी कराने का प्रयास किया गया।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गुजारा
लगातार बढ़ती परेशानियों के बीच मां-बेटी को अलग रहकर जीवन गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ा। पति के पैतृक इलाके में उन्हें जमीन का एक टुकड़ा तो मिला, लेकिन वहां रहने के लिए न तो उचित मकान था और न ही बिजली, पानी व शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं। दोनों किसी तरह अपना जीवन आगे बढ़ा रही थीं।
जनता दरबार में रखी अपनी परेशानी
अपनी परेशानी लेकर रूबी सिन्हा ने उपायुक्त के जनता दरबार में अपनी बात रखी। वहां से उन्हें पुलिस अधीक्षक से मिलने की सलाह दी गई। मामला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार की आवश्यक मदद के निर्देश दिए।
पुलिस ने टेंट, बिजली और राशन की कराई व्यवस्था
एसपी के निर्देश पर पुलिस प्रशासन ने सबसे पहले शौचालय की व्यवस्था कराई। इसके बाद मां-बेटी के रहने के लिए टेंट, बिजली और राशन की व्यवस्था की गई। बेटी कृतिका की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उसे किताबें और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
पढ़ाई जारी रखने को दी प्राथमिकता
राजमहल एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। कृतिका ने अपनी पढ़ाई जारी रखने की इच्छा जताई थी, जिसे देखते हुए उसकी शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है।उन्होंने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। जरूरत के समय पीड़ित और असहाय लोगों की सहायता करना भी पुलिस की सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
मदद मिलने के बाद कृतिका के चेहरे पर लौटी उम्मीद
पुलिस की मदद मिलने के बाद कृतिका ने कहा कि इस सहयोग से उसके जीवन में फिर से उम्मीद जगी है। वह अपनी पढ़ाई जारी रखकर आगे अपने सपनों को पूरा करना चाहती है। वहीं, रूबी सिन्हा ने पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह और उपायुक्त के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की पहल से उन्हें अपनी बेटी के भविष्य को लेकर नई उम्मीद मिली है। साहिबगंज पुलिस की यह पहल कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक तस्वीर पेश करती है। लंबे संघर्ष के बीच मां-बेटी को मिली यह मदद उनके लिए सिर्फ राशन, बिजली या रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया सहारा बन गई है।

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