द फॉलोअप डेस्क
फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडियाकी पहल “फार्मा अन्वेषण” के तहत “फार्मा अन्वेषण झारखंड 2026” का भव्य और सफल आयोजन 16 मार्च को रांची में किया गया। कार्यक्रम की मेजबानी RKDF यूनिवर्सिटी रांची के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा की गई। यह आयोजन सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान सभागार में हुआ, जिसमें झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों, फार्मेसी महाविद्यालयों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “फ्यूचर फार्मा इकोसिस्टम: अकादमिक, इंडस्ट्री, रिसर्च, रेगुलेटरी एवं प्रैक्टिस के बीच समन्वय” रखी गई थी। इसका उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा विद्यार्थियों में नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में फार्मेसी की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण दवाओं का विकास, अनुसंधान आधारित फार्मास्यूटिकल नवाचार और आधुनिक तकनीकों का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में धर्मेंद्र सिंह, शशि प्रकाश झा और रितु सहाय उपस्थित रहे। अतिथियों ने फार्मेसी शिक्षा में अनुसंधान, नवाचार और उद्योग के साथ सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों को अपने विचार और शोध प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं विकसित होती हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए कई शैक्षणिक और नवाचार आधारित प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें आइडिया प्रेजेंटेशन एवं इनोवेशन प्रतियोगिता, स्टार्टअप और उद्यमिता आधारित विचार प्रस्तुति, रिसर्च पेपर और पेटेंट प्रस्तुति, वर्किंग मॉडल एवं कॉन्सेप्ट मॉडल प्रदर्शनी तथा पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता शामिल थीं। इन प्रतियोगिताओं में विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने वैज्ञानिक शोध, नवाचार और तकनीकी विचारों को प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों की जूरी द्वारा इन प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।
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इस अवसर पर प्रो. डॉ. एस. चटर्जी ने कहा कि फार्मा अन्वेषण जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार की दिशा में प्रेरित करते हैं। ऐसे आयोजनों से शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित होता है, जिससे फार्मेसी शिक्षा को नई दिशा और गति मिलती है। वहीं विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडे ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है। इसके माध्यम से छात्रों को अपने शोध कार्य, नवाचार और वैज्ञानिक विचारों को विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला, जिससे उनके ज्ञान, आत्मविश्वास और व्यावहारिक अनुभव में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और फार्मेसी महाविद्यालयों के शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया तथा भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता जताई। फार्मा अन्वेषण झारखंड 2026 का यह आयोजन फार्मेसी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ और इसने राज्य में फार्मा क्षेत्र के विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान की।