सिमडेगा:
सिमडेगा राशन डीलरों को लंबे समय से कमीशन का भुगतान नहीं मिलने और गोदाम से निर्धारित वजन से कम खाद्यान्न मिलने की समस्या को लेकर मंगलवार को सिमडेगा में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। धरना के दौरान डीलरों ने बकाया कमीशन का भुगतान, सही वजन में खाद्यान्न उपलब्ध कराने, सर्वर एवं नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान तथा समय पर राशन आवंटित करने की मांग की।

पीडीएस जिलाध्यक्ष प्रमोद प्रसाद ने कहा कि झारखंड के करीब 25 हजार पीडीएस डीलर लगभग 65 लाख लाभुकों तक अनाज पहुंचाने का काम करते हैं। लोगों की थाली तक अनाज पहुंचाने वाले डीलर आज खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि करीब 12 माह से डीलरों का कमीशन बकाया है। डीलरों को कोई निश्चित मानदेय नहीं मिलता और वे कमीशन के आधार पर काम करते हैं। ऐसे में सरकार को डीलरों की कम से कम 50 हजार रुपये मासिक आय सुनिश्चित करने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिमडेगा जैसे पहाड़ी और जंगली क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या के कारण ई-पॉस मशीन से राशन वितरण में काफी परेशानी होती है। कई बार सर्वर डाउन रहने से समय पर राशन वितरण नहीं हो पाता है। उन्होंने पीडीएस व्यवस्था को पूरी तरह पेपरलेस करने के साथ सर्वर और नेटवर्क की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
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50 किलो की जगह 40-48 किलो तक चावल मिलने का आरोप
प्रमोद प्रसाद ने गोदाम से कम वजन में खाद्यान्न मिलने की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि कई बार 50 किलो के बोरे में निर्धारित मात्रा से कम चावल मिलता है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में बोरे में आधा किलो से एक किलो तक कम चावल रहता है। इसके बावजूद डीलरों को लाभुकों को निर्धारित मात्रा में पूरा राशन देना पड़ता है। उन्होंने गोदाम स्तर पर ही खाद्यान्न का सही वजन सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि 30 सितंबर तक मांगों का समाधान नहीं हुआ तो डीलर राजभवन का घेराव करेंगे। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर “दाम नहीं तो काम नहीं, कमीशन नहीं तो काम नहीं” के तहत हड़ताल की जाएगी।.jpeg)
दूसरों की थाली में खाना परोस रहे हैं और हम खुद भूखे हैं: महिला डीलर
धरना में शामिल महिला डीलर तारामुनी रोहिणी देवी ने कहा कि करीब एक साल से उन्हें उनके काम का भुगतान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि डीलरों के भी बच्चे और परिवार हैं। मजदूरी करने वाले लोगों को 400-500 रुपये तक मिल जाते हैं, लेकिन डीलरों को उनके काम का पैसा नहीं मिल रहा है।उन्होंने कहा कि पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण ई-पॉस मशीन से राशन वितरण में काफी परेशानी होती है।
कई बार नेटवर्क नहीं रहने के कारण लाभुकों को समय पर राशन नहीं मिल पाता और इसका गुस्सा भी डीलरों को झेलना पड़ता है।तारामुनी रोहिणी देवी ने कहा कि कई बार गोदाम से मिलने वाले 50 किलो के बोरे में 45, 40 या 48 किलो तक ही चावल मिलता है। इसके बावजूद लाभुकों को निर्धारित मात्रा में राशन देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कम वजन में चावल मिलने की भरपाई करना डीलरों के लिए मुश्किल होता है। उन्होंने सरकार से बकाया कमीशन का भुगतान और उचित मानदेय देने की मांग की।
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सर्वर पकड़ने के लिए 10-15 किलोमीटर जाना पड़ता है:पीडीएस डीलर
पीडीएस डीलर कांति देवी ने कहा कि डीलरों को वेट मशीन उपलब्ध कराई गई है, लेकिन सर्वर की समस्या के कारण राशन वितरण सही तरीके से नहीं हो पाता। कई बार सर्वर डाउन रहने के कारण पूरे महीने में भी राशन वितरण पूरा नहीं हो पाता। सर्वर पकड़ने के लिए उन्हें कई बार अपने क्षेत्र से 10 से 15 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है।उन्होंने कहा कि सरकार के नियम के अनुसार लाभुकों को निर्धारित मात्रा में राशन मिलना चाहिए, लेकिन गोदाम से मिलने वाले बोरे में कई बार 48, 46 या 45 किलो तक ही चावल रहता है। इसके बावजूद लाभुकों को पूरा राशन देना पड़ता है। कम वजन में राशन मिलने से डीलरों को आर्थिक नुकसान और वितरण के दौरान विवाद दोनों का सामना करना पड़ता है।
कांति देवी ने सरकार से गोदाम से सही वजन में खाद्यान्न उपलब्ध कराने, सर्वर एवं ई-पॉस मशीन की समस्या का स्थायी समाधान करने और डीलरों के लंबित कमीशन का जल्द भुगतान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण पीडीएस दुकान चलाना डीलरों के लिए काफी मुश्किल हो गया है।