द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
रांची में आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की बढ़ती परेशानी के बीच नगर निगम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नगर निगम की ओर से शहर के अलग-अलग इलाकों में फीडिंग जोन बनाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों को आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग एरिया विकसित करने और उन्हें चिन्हित करने का निर्देश दिया है। रांची नगर निगम ने शहर के 53 वार्डों में आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी और एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने का अभियान भी चला रखा है। इसके अलावा 57 फीडिंग पॉइंट चिह्नित किए गए हैं, ताकि कुत्तों को सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर कहीं भी खाना खिलाने के बजाय निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया जा सके। वहीं शेल्टर होम के लिए ऐसी जमीन की तलाश की जा रही है, जहां पर्याप्त जगह हो और आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी न हो।

जमीन से लेकर क्षमता और संचालन तक कई चुनौतियां
नगर आयुक्त सुशांत गौरव के अनुसार योजना व्यापक है और इसे पूरी तरह जमीन पर उतारने में समय लग सकता है। शेल्टर होम के लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कुछ स्थानों पर स्थानीय लोगों के विरोध के कारण परेशानी सामने आई है। नगर निगम का प्रयास है कि ऐसी जगह चुनी जाए, जहां शेल्टर की व्यवस्था व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सके। शेल्टर के लिए केवल जमीन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसकी क्षमता, निर्माण, बजट और संचालन की पूरी योजना भी तैयार करनी होगी। कुत्तों के लिए भोजन, पानी, साफ-सफाई, देखभाल और पशु चिकित्सा की व्यवस्था के साथ कर्मचारियों की जरूरत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी शेल्टर में भीड़भाड़ रोकने, पर्याप्त भोजन और नियमित देखभाल तथा पशु चिकित्सा की व्यवस्था पर जोर दिया है। मेयर रोशनी खलखो का कहना है कि इस दिशा में काम आगे बढ़ाया गया है, हालांकि कुछ जगहों पर विवाद के कारण अड़चन आ रही है। फिलहाल शेल्टर होम की जमीन और क्षमता को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं हुई है।

छह महीने में 52,669 डॉग बाइट के मामले
रांची में बढ़ते डॉग बाइट के मामले इस पूरी व्यवस्था की जरूरत को भी सामने रखते हैं। सदर अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जून 2026 के बीच छह महीनों में 52,669 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। इस दौरान नए और पुराने मरीजों को मिलाकर हर दिन औसतन करीब 290 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लेने अस्पताल पहुंचे, जबकि कुछ दिनों में यह संख्या 300 से 500 तक भी पहुंची। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रांची में हर महीने औसतन 6,200 से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। 2024 में 19,604 मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 24,572 हो गए। यानी एक साल में 4,968 मामलों की बढ़ोतरी हुई और दोनों वर्षों को मिलाकर कुल 44,176 मामले दर्ज किए गए। बच्चों और बुजुर्गों के भी प्रभावित होने की बात सामने आती रही है। अब निगम के सामने शेल्टर होम के लिए जमीन को अंतिम रूप देने, उसकी क्षमता तय करने, निर्माण और संचालन के लिए बजट व संसाधन जुटाने तथा फीडिंग जोन को व्यवस्थित तरीके से चलाने की चुनौती है। सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने की स्थिति में उन्हें रखने की व्यवस्था पहले से तैयार करना भी निगम के लिए अहम होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में शेल्टर होम की जमीन और उसकी क्षमता तय होने के बाद ही निगम की तैयारी की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।