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रांची : सरकारी जमीन से हटेगा भू-माफियाओं का अवैध कब्जा; हातमा पहाड़ पर बनेंगे गरीबों के फ्लैट्स

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रांची 
नगर निगम ने शहर में भू-माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसके तहत सरकारी जमीनों को चिन्हित कर अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा रहा है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी भूमि को अपने कब्जे में लेकर वहां जनहित से जुड़ी विभिन्न विकास योजनाओं को धरातल पर उतारना है। इसी क्रम में, नगर आयुक्त सुशांत गौरव के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने हातमा पहाड़ और मिसिरगोंदा तालाब क्षेत्र का विस्तृत जमीनी निरीक्षण किया। इस कार्रवाई के दौरान हातमा पहाड़ के पास मिली 3.57 एकड़ जमीन पर गरीबों के लिए जी प्लस थ्री (G+3) चार मंजिला आधुनिक फ्लैट्स बनाने का निर्णय लिया गया है, जबकि 5.88 एकड़ में फैले ऐतिहासिक मिसिरगोंदा तालाब का अंचल कार्यालय के साथ संयुक्त सीमांकन कर इसके सौंदर्यीकरण और कायाकल्प की रूपरेखा तैयार की जा रही है।


चार मंजिला उंचाई के आधुनिक फ्लैट्स का होगा निर्माण 
निरीक्षण प्रशासनिक टीम को पता चला कि हातमा पहाड़  के समीप कुल 3.57 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध है। इस कीमती जमीन को सुरक्षित करने के लिए नगर आयुक्त ने संबंधित अंचल कार्यालयों को पूरी भूमि का अविलंब सीमांकन करने  का कड़ा निर्देश जारी कर साथ ही उन्होंने एक बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि इस जमीन का उपयोग गरीबों और समाज के जरूरतमंद लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यहां उनके अवास के लिए  G+3 यानी चार मंजिला उंचाई के आधुनिक फ्लैट्स का निर्माण कराया जाएगा, जिससे बेघर लोगों को अपना आशियाना मिल सकेगा। मिसिरगोंदा तालाब का बदलेगा रूप
हातमा पहाड़ को देखने के बाद नगर आयुक्त सुशांत गौरव अपनी टीम के साथ मिसिरगोंदा इलाके पहुंचे। वहां उन्होंने 5.88 एकड़ में फैले ऐतिहासिक मिसिरगोंदा तालाब का अच्छे से मुआयना किया। तालाब के आसपास हो रहे अवैध कब्जों और उसकी खराब हालत को देखते हुए, नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अंचल की टीम के साथ मिलकर जल्द से जल्द तालाब की जमीन को नापें और उसकी सीमा तय करें। इसके साथ ही, उन्होंने इस बड़े तालाब को सुंदर बनाने और स्थानीय लोगों के घूमने-फिरने के लिए विकास योजनाओं का एक प्लान तैयार करने का भी आदेश दिया है।खाली जमीन पर बनेंगे पार्क, पार्किंग और गरीबों के घर
नगर निगम की इस सख्त कार्रवाई से अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप मच गया है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि वे सबसे पहले सरकारी कागजों को देखकर शहर की ऐसी सभी जमीनों की पहचान कर रहे हैं, जो सरकारी हैं। इसके बाद उन जमीनों के चारों तरफ दीवार बनाकर या उनकी सीमा तय करके उन्हें अपने कब्जे में लिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर कोई दोबारा उन पर जबरन कब्जा न कर सके। नगर आयुक्त ने साफ तौर पर कहा है कि इन खाली कराई गई जमीनों का उपयोग आम जनता की सुविधाओं के लिए ही किया जाएगा—जैसे कि पार्क, पार्किंग बनाना, तालाबों को साफ और सुंदर बनाना और गरीबों के लिए घर तैयार करना।

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