रांची
निजी अस्पताल नहीं रोक सकते मरीज का शव। मरीज के शव को परिजनों को नहीं सौंपना राज्य सरकार के आदेश और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। ऐसा हुआ तो होगी कार्रवाई। दरअसल, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने बीते शनिवार जिले के सभी निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। बैठक में अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, मरीजों को बेहतर इलाज और सरकारी योजनाओं के सही संचालन को लेकर कई जरूरी निर्देश दिए गए। इस दौरान उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रबंधन को चेताया कि अगर किसी मरीज की मौत हो जाती है और परिवार पैसे चुका पाने में असमर्थ है, तो किसी भी हाल में अस्पताल मरीज का शव नहीं रोक सकता है। मरीज के शव को परिजनों को नहीं सौंपना राज्य सरकार के आदेश एवं क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। उपायुक्त ने जिले के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लिंग जांच से जुड़े कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी सेंटर का नाम भ्रूण लिंग जांच जैसे गैरकानूनी काम में सामने आता है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
DC ने सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर जांच का निर्देश
उपायुक्त ने सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालकों को यह भी निर्देश दिया कि उनके निबंधन की अवधि खत्म होने से पहले ही नवीकरण के लिए आवेदन कर दें, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो। सभी अस्पतालों को फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट को लेकर विशेष सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पतालों की वायरिंग, आईसीयू में लगे एसी, मेडिकल उपकरण और जनरेटर की नियमित जांच विशेषज्ञों से कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सिविल सर्जन समेत कई बड़े अधिकारी रहे शामिल
बैठक में आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों को मिलने वाले भुगतान की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने अस्पतालों को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन के अनुसार इलाज और प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया, ताकि भुगतान समय पर हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन रद्द किया जा सकता है। साथ ही अस्पतालों को डेंगू, मलेरिया, टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों के मरीजों की जानकारी समय पर स्वास्थ्य विभाग को देने का निर्देश दिया गया। उन्होंने ये भी कहा बायोमेडिकल वेस्ट के सही निपटान, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के प्रमाणपत्रों की नियमित जांच तथा मरीजों और उनके परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार रखने पर भी जोर दिया गया। इस दौरान सिविल सर्जन प्रभात कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-हेल्थ नोडल पदाधिकारी राजेश साहू, जिला समन्वयक आयुष्मान भारत योजना, विभिन्न निजी अस्पतालों के प्रबंधक और इंश्योरेंस कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।