गुमला:
रक्षाबंधन के मौके पर झारखंड के 700 गांवों में 1 लाख पेड़ों को राखी बांधी गई। पेड़ बचाओ अभियान के तहत अगले 1 महीने में सभी 24 जिलों में 3 लाख पेड़ों को राखी बांधने का लक्ष्य रखा गया है। झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने शुक्रवार को गुमला के जोराड गांव में पेड़ को राखी बांधकर अभियान की शुरुआत की। संजीव कुमार द्वारा सबसे पहले वर्ष 2004 में ही धनबाद के टुंडी ब्लॉक अंतर्गत लुकाइया गांव से इस पहल की शुरुआत की गई थी। संजीव कुमार का दावा है इस पहल से झारखंड का वनक्षेत्र, 1,128 वर्ग किमी बढ़ा है। उनका दावा है कि वर्ष 2004 से लेकर अब तक झारखंड के 12 हजार से ज्यादा गांवों को इससे जोड़ा गया है।

लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ना जरूरी
संजीव कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन के त्योहार में बहन रक्षासूत्र बांधती है और भाई उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं। पर्यावरण की रक्षा करना भी हमारा परम कर्तव्य है। इस पर हमारा जीवन निर्भर करता है। संजीव कुमार ने कहा कि पेड़ बचाओ अभियान का मकसद लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। इस अभियान के तहत लोग पेड़ों को राखी बांधकर उनकी रक्षा करने का संकल्प लेंगे।

700 गावों में कुल 1 लाख पेड़ों को बांधी गई राखी
गौरतलब है कि शुक्रवार को रक्षाबंधन वाले दिन 700 गांवों में कुल 1 लाख पेड़ों को राखी बांधी गई। 1 महीने तक चलने वाले इस अभियान में 3 लाख पेड़ों को राखी बांधी जाएगी। संजीव कुमार की सोच से इस पहल की शुरुआत वर्ष 2004 में धनबाद जिले के टुंडी ब्लॉक अंतर्गत लुकाइया गांव से हुई थी। यह तब घोर नक्सल प्रभावित इलाका हुआ करता था। प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कि 2004 से लेकर अब तक, झारखंड के 12,000 से ज्यादा गांवों को इस अभियान से जोड़ा गया है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने बताया कि इस पहल के जरिए लुकाइया गांव में 20 हजार से ज्यादा पेड़ों को बचाया गया। ये पेड़ अब ग्रामीणों की आजीविका में काफी योगदान दे रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस अभियान से कई गांवों में छोटे वन उत्पाद उगाए गये, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़ी। संजीव कुमार ने दावा किया कि इस पहल से झारखंड में वनक्षेत्र में भी काफी इजाफा हुआ है।

झारखंड में इस पहल से वनक्षेत्र बढ़ने का दावा
संजीव कुमार ने फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के हवाले से यह दावा किया कि 2001 के बाद पिछले 2 दशक में झारखंड का वनक्षेत्र करीब, 1,128 वर्ग किमी बढ़ा है। 2023 के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड का वनक्षेत्र 23,765.78 वर्ग किमी था, जो प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 29.76 प्रतिशत है। 2001 में वनक्षेत्र 22,637 वर्ग किमी था। रिपोर्ट के मुताबिक कुल वनक्षेत्र में 2,635.35 वर्ग किमी बहुत घना, 9,640.99 वर्ग किमी मध्यम घना और 11,489.44 वर्ग किमी खुला वनक्षेत्र था।
संजीव कुमार ने कहा कि इस अभियान से जल संरक्षण और वनों को विकसित करने में काफी सहायता मिली है।