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पंचायती राज से कंप्यूटर क्रांति तक, कांग्रेस ने राजीव गांधी के पुण्यतिथि पर याद किए उनके फैसले 

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रांची 

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न राजीव गांधी की 26वीं पुण्यतिथि शहादत दिवस के रूप में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मनाई गयी। आज के दिन को कांग्रेस उर्जा दिवस के रूप में याद करती है। वहीं प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि राजीव गांधी झारखंड की जनता को सदैव याद रहेंगे। देश में शांति और एकता को बहाल रखने के लिए अखंड भारत के सपनों को साकार रखने के लिए उनकी दी गई शहादत को देश सदैव याद रखेगा। झारखंड अलग राज्य के बिना यहां रहने वाले आदिवासियों एवं दूसरे समुदाय के लोगों का विकास संभव नहीं है। यह विचार राजीव गांधी ने गुमला, सिमडेगा और खूंटी की जनसभाओं में प्रकट किया था। राजीव गांधी अपने प्रधानमंत्रीत्व काल में योजनाओं में झारखंड के हितों को सर्वोपरि रखते थे। 

कंप्यूटर युग की शुरुआत उन्हीं की देन

कांग्रेस नेताओं ने श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को महान स्वप्न द्रष्टा बताते हुए कहा कि स्व.गांधी का भारत को 21वीं सदी में ले जाने का जो प्रयास था उसकी एक मजबूत नींव उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान रखा था। भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत उन्हीं की देन है। वहीं राजीव गांधी के सत्ता विकेन्द्रीकरण का विस्तार से चर्चा की। राजीव गांधी का यह सपना था कि गांवों में बसने वाले भारत कायाकल्प तभी हो सकता है जब पंचायतों के माध्यम से चुने हुए जनप्रतिनिधियों के हाथों से सत्ता संचालित होगी। 18 वर्ष के युवाओं को मताधिकार, पंचायती राज शासन व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण जैसे कालजयी निर्णय देश के विकास में अपनी भूमिका निभा रहा है।

सैकड़ो लोग शामिल

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख रूप से दयामणि बारला, अभिलाष साहू, राकेश सिन्हा, रविंद्र सिंह, विनय सिन्हा, दीपू लाल, किशोर नाथ शाहदेव, राजीव रंजन प्रसाद, सोनाल शांति, राजन वर्मा, आदित्य विक्रम जायसवाल, अमरेंद्र सिंह, सुरेन राम सुधीर, जगदीश साहू, रमाकांत आनंद, सुनील सिंह, कामेश्वर गिरी, राजेश सिंहासन, उज्जवल तिवारी, सत्यनारायण सिंह, राजू राम, चंद्ररश्मि पिंगुआ, संगीता टोप्पो, नीलम सहाय, मिनी बाड़ा, नरेंद्र कुमार लाल, अनिल उरांव, विकी करमाली, भोलानाथ सिंह, नेलीनाथन, अमित कुमार झा, अजमल हुसैन, बेसिल खलखो, संजय कुमार ओझा, प्रोफेसर उदय प्रकाश समेत सैकड़ो लोग शामिल थे।

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