द फॉलोअप डेस्कः
एनआईए ने ISIS के झारखंड मॉड्यूल केस में गिरफ्तार आरोपी राहुल सेन को कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एनआईए यह जानना चाह रही है कि राहुल उर्फ उमर ने भड़काऊ और कट्टरपंथी सामग्री खुद बनाई थी या कोई और संपादित किया था। शुरुआती जांच में यह पता चला है कि आरोपी राहुल सेन ने आतंकवादी प्रचार सामग्री के प्रसार के लिए सोशल मीडिया पर आईएसआईएस से जुड़े कई साइबर समूह बना रखे थे। जिसका संचालन वह खुद करता था। यह भी पता चला है कि राहुल आईएसआईएस के ट्रेनिंग और वैचारिक वीडियो का प्रचार-प्रसार कर युवाओं को देश के खिलाफ हिंसक कार्रवाई के लिए भर्ती कर रहा था। पूछताछ में कई और राज का खुलासा धीरे-धीरे हो रहा है। आतंकी राहुल सेन को रांची सिविल कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष कोर्ट में 16 सितंबर को पेश किया गया था।

फैजान की निशानदेही पर हुई थी छापेमारी
मालूम हो कि एनआईए ने आरोपी फैजान अंसारी की निशानदेही पर 14 सितंबर को देश के छह राज्यों में एक साथ छापेमारी की थी। जिसमें राहुल सेन को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले आलोट थाना क्षेत्र के खजुरी दावड़ा गांव से गिरफ्तार किया गया था। उसके घर से कई आपत्तिजनक सामान मिले थे। उसके मोबाइल में आईएसआईएस से संबंधित वीडियो समेत कई आपत्तिजनक डेटा मिले हैं।

एनआईए ने 19 जुलाई को एफआईआर दर्ज की थी
झारखंड आईएसआईएस मॉडयूल को लेकर एनआईए ने 19 जुलाई को एफआईआर दर्ज की थी। उसी दिन फैजान अंसारी की गिरफ्तारी हुई थी। एनआईए की जांच में यह बात सामने आयी है कि 19 वर्षीय फैजान अंसारी ने झारखंड मॉडयूल के गठन में अहम भूमिका निभायी थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए वह आईएसआईएस से लोगों को जोड़ रहा था। साथ ही आतंकी संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार भी करता था। आईएसआईएस में युवाओं को जोड़कर उसकी योजना आतंकी वारदात को अंजाम देने की थी। एनआईए अधिकारियों के मुताबिक, बिहार के सीवान, उत्तर प्रदेश के जौनपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, मध्यप्रदेश के रतलाम, पंजाब के लुधियाना, दक्षिणी गोवा, कर्नाटक के यदगीर और मुंबई में एनआईए ने छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान आईएसआईएस से जुड़े वीडियो भी एजेंसी को मिले हैं।
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