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सड़क नहीं तो खाट ही सहारा, गर्भवती को 2 किलोमीटर पैदल ढोने को मजबूर हुए ग्रामीण

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द फॉलोअप डेस्क
गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड स्थित चसगांवा पंचायत के डऊ टोला में सड़क नहीं होने की वजह से परिजनों और ग्रामीणों को उसे खाट पर लादकर करीब दो किलोमीटर तक बारिश के बीच पैदल चलना पड़ा। मुख्य सड़क तेलो पहुंचने के बाद टोटो की मदद से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। बताया गया कि सुनिल हेंब्रम की 25 वर्षीय पत्नी मुन्नी टुडू को 20 जुलाई को प्रसव पीड़ा हुई थी, लेकिन गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकी।


सड़क नहीं, गांव तक नहीं पहुंचती एंबुलेंस
गर्भवती महिला के पति सुनील हेंब्रम ने बताया कि गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस, टोटो या अन्य वाहन नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को मरीजों को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है, जिससे ग्रामीणों को हर बार भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।


स्थानीय बोले- वर्षों से सड़क की मांग
स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में सड़क निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि जहां सड़क की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां आज भी मूलभूत सुविधा नहीं है, जबकि अन्य स्थानों पर सड़क निर्माण किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जीवन से जुड़े कार्य भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

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