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4 माह से ढिबरी युग में जी रहा गुमला का अमकुली टंगरा गांव, बच्चों की पढ़ाई रुकी, सांप-बिच्छू का भी खतरा

4 माह से ढिबरी युग में जी रहा गुमला का अमकुली टंगरा गांव, बच्चों की पढ़ाई रुकी, सांप-बिच्छू का भी खतरा

सुशील सिंह/गुमला:

गुमला का अमकुली टंगरा गांव करीब 4 महीने से ढिबरी युग में जीने को विवश है। सिसई प्रखंड अंतर्गत ओलमुंडा पंचायत के इस गांव में 4 महीने से ट्रांसफॉर्मर खराब है, जिसकी वजह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। लंबे समय से बिजली की आपूर्ति नहीं होने से ग्रामीणों को ढिबरी  की रोशनी से काम चलाना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई के अलावा रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। समस्या यह भी है कि ढिबरी भी पूरी तरह नहीं जल पाती, क्योंकि मिट्टी का तेल 160 रुपये प्रति लीटर भी बमुश्किल मिल पाता है। 

शिकायत पर विभाग ने नहीं लिया संज्ञान
ग्रामीणों ने ट्रांसफॉर्मर खराब होने की जानकारी विभाग को दी है। हालांकि, अब तक न तो ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत की गई और ना ही इसे बदला गया है। बच्चों की पढ़ाई हो, मोबाइल फोन चार्ज करना हो, रसोई पकाना हो या कोई मशीन चलाना हो। सारे काम बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 

मानसून में स्थिति और भी ज्यादा विकट हो गई
ग्रामीणों  ने बताया कि मानसून में लगातार हो रही बारिश से स्थिति और भी ज्यादा विकट हो गई है। घरों में जहरीले सांप घुस आते हैं। महिलाओं को घरेलु कामों में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गांव की गलियां भी शाम ढलते ही अंधेरे की चादर ओढ़ लेती है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान है। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से ट्रांसफॉर्मर को बदलने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि 21वीं सदी में जहां न्यू इंडिया और डिजिटल इंडिया का नारा दिया जा रहा है, वहां एक गांव का 4 महीने तक बिना बिजली के रहना व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। 

सरकारी दावों की पोल खोल रहा ये गांव
कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि मानसून में वज्रपात की घटनाओं की वजह से ट्रांसफॉर्मर खराब होता है। यदि ट्रांसफॉर्मर की जगह बदल दी जाए तो समस्या से निजात मिलेगी।  सरकार 200 यूनिट फ्री बिजली देने की बात कहती है। जबकि हकीकत ये है कि एक आदिवासी बहुल गांव में 4 महीने से विद्युत आपूर्ति ठप है। बिजली विभाग यह दावा करता है कि शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर ट्रांसफॉर्मर बदल दिया जायेगा, लेकिन यहां 4 महीने बीत गए हैं। 
 

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