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सालानपुर में खनन माफिया पर पुलिस और केंद्रीय बलों की आधी रात को छापेमारी, 4 रसूखदार गिरफ्तार

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जामताड़ा
पश्चिम बंगाल के सालानपुर ब्लॉक में राष्ट्रीय संपदा की खुली लूट और अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। रूपनारायणपुर पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 7 जून की देर रात एक बेहद गोपनीय छापेमारी करते हुए इलाके के 4 रसूखदार पत्थर माफियाओं को गिरफ्तार कर लिया है। नए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद पुलिस कमिश्नर के सख्त निर्देश पर हुई इस अचानक दबिश से पूरे खनन माफिया जगत में हड़कंप मच गया है। इन अवैध खदानों में होने वाले भारी विस्फोटों के कारण न केवल ऐतिहासिक अजय नद का अस्तित्व खतरे में पड़ गया था, बल्कि चित्तरंजन रेल प्रशासन (CLW) की सरकारी संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा था। ​कमिश्नर के निर्देश पर रात के अंधेरे में दबिश
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जीतपुर-उत्तररामपुर और कल्या पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खदानें संचालित की जा रही थीं। पुलिस कमिश्नर के सख्त निर्देशों और लगातार मिल रही पुख्ता शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने विभिन्न गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय वाहिनी के जवानों ने रात के अंधेरे में सुनियोजित तरीके से खदान परिसरों में छापेमारी की। इस कार्रवाई में रंजीत सिंह, बिषम राय, मधुसूदन मंडल और राकेश कुमार सिंह उर्फ 'जोगिंदर' को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बड़ी कार्रवाई में जहां चार रसूखदार आरोपी दबोचे गए, वहीं मामले का एक अन्य मुख्य आरोपी मिहिर घोष पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। ​सत्ता परिवर्तन के बाद बदला रुख, माफियाओं पर कसा शिकंजा
राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, नई भाजपा सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया था कि कोयला, बालू, मिट्टी और पत्थर का कोई भी अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार बनते ही इन खदानों को अस्थायी रूप से बंद तो कर दिया गया था, लेकिन किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई का इंतजार था। आखिरकार, शीर्ष स्तर और सरकार से हरी झंडी मिलते ही स्थानीय पुलिस ने केंद्रीय बलों के साथ मिलकर इन माफियाओं की कमर तोड़ दी है। इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अवैध कारोबारियों में भी दहशत का माहौल है। चित्तरंजन रेल संपत्ति और अजय नद के अस्तित्व को था खतरा
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, जीतपुर की तीन, कल्या की एक और नामोकेशिया की एक अवैध पत्थर खदान में नियमों को ताक पर रखकर भारी विस्फोट (Blasting) किए जा रहे थे। इस अवैध खनन के कारण गंभीर संकट पैदा हो गया था:
अत्यधिक और अनियंत्रित खनन के कारण ऐतिहासिक अजय नद (अजय नदी) का प्राकृतिक प्रवाह और मार्ग पूरी तरह बदल रहा था।
खदान संचालकों ने पूरे क्षेत्र को असुरक्षित और भयानक मौत के गड्ढों में तब्दील कर दिया था।
चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (CLW) प्रशासन द्वारा निर्मित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह (विद्युत शवदाह गृह) की दीवारों में इन भारी विस्फोटों के कारण गहरी दरारें आ गई थीं, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
राष्ट्रीय संपदा की इस खुली लूट से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा था।
 

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