द फॉलोअप डेस्क
पलामू में कांडों के पर्यवेक्षण के लिए क्षेत्र भ्रमण पर निकलने वाले डीएसपी सह एसडीपीओ छतरपुर प्रशांत कुमार की कार्यशैली पुलिसिंग के मानवीय और संवेदनशील पहलू को सामने ला रही है। कांडों के पर्यवेक्षण के दौरान वे केवल अनुसंधान की प्रगति और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि रास्ते में आम लोगों को देखकर रुकते हैं और उनसे सहज तरीके से बातचीत करते हैं। इस दौरान वे स्थानीय लोगों से क्षेत्र की स्थिति, उनकी समस्याओं और पुलिस के प्रति उनके अनुभव की जानकारी लेते हैं। अपराध नियंत्रण और कांडों के त्वरित अनुसंधान के क्षेत्र में भी उनके नेतृत्व में प्रभावी परिणाम सामने आए हैं। बड़े NDPS मामलों के साथ हत्या, चोरी और अन्य गंभीर आपराधिक घटनाओं का कम समय में उद्भेदन करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है। इससे क्षेत्र में अपराधियों के बीच कानून का भय और आम लोगों के बीच पुलिस के प्रति भरोसा मजबूत होने का दावा किया गया है। एसडीपीओ छतरपुर के रूप में पदस्थापना के बाद पिछले तीन महीनों में कांडों के निष्पादन की दर लगातार 125 प्रतिशत से अधिक रही है, जो लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ अनुसंधान की गुणवत्ता और गति पर दिए जा रहे ध्यान को दर्शाती है।

बच्चों और युवाओं से भी करते हैं संवाद
डीएसपी प्रशांत कुमार की कार्यशैली का एक अहम हिस्सा बच्चों और युवाओं से सहज संवाद भी है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान वे बच्चों से बातचीत कर उन्हें नियमित पढ़ाई, अनुशासन, अच्छे संस्कार और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं युवाओं को नशे और गलत संगति से दूर रहने तथा शिक्षा, खेल, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़कर बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उनका मानना है कि पुलिसिंग सिर्फ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और युवाओं व बच्चों को सही दिशा के लिए प्रेरित करना भी प्रभावी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सम्मान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व तक
डीएसपी प्रशांत कुमार की उपलब्धियों की बात करें तो वर्ष 2016 में उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। इसके बाद वर्ष 2017 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा उन्हें राष्ट्रीय विसाका सम्मान भी प्रदान किया गया था। इसी वर्ष उन्होंने दक्षिण कोरिया गए भारतीय युवा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था। उनकी मौजूदा कार्यशैली में एक ओर गंभीर अपराधों के त्वरित उद्भेदन और कांडों के निष्पादन पर जोर दिखाई देता है, तो दूसरी ओर आम लोगों के बीच जाकर संवाद और नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश भी नजर आती है।