सरायकेला-खरसावां
सरायकेला-खरसावां जिले में रक्षाबंधन के पर्व पर चांडिल वन क्षेत्र के गुंडाबिहार गांव में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संदेश देखने को मिला। वन प्रबंधन संरक्षण समिति की ओर से ‘एक पेड़ भाई के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया। जहां महिलाओं और युवतियों ने पेड़ों को राखी बांधी। इस दौरान ग्रामीणों ने जंगल और पेड़ों की रक्षा का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं एवं युवतियों ने पेड़ों की पूजा-अर्चना कर उन्हें राखी बांधी और “पेड़ काटेंगे नहीं, काटने देंगे नहीं” का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम का नेतृत्व वन प्रबंधन संरक्षण समिति के श्रीकृष्णा सिंह सरदार, नीमडीह प्रभारी फॉरेस्ट रतन गोराई एवं वनरक्षी रघुवर सिंह मुंडा ने किया।

गुंडाबिहार का जंगल वन्यजीवों का आश्रय स्थल
इस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि उनके जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जंगल सुरक्षित रहेगा तो पर्यावरण और वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे। ग्रामीणों के अनुसार गुंडाबिहार का यह जंगल बड़ी संख्या में वन्यजीवों का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। यहां सैकड़ों साल के विशाल पेड़ों के साथ राष्ट्रीय पक्षी मोर, लोमड़ी और हाथियों का भी विचरण होता है। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने लोगों से अपील की कि पर्यावरण संरक्षण को केवल अभियान तक सीमित न रखकर हर व्यक्ति पेड़-पौधों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाए। महिलाओं ने कहा कि जिस तरह भाई-बहन के रिश्ते की रक्षा का संकल्प रक्षाबंधन पर लिया जाता है, उसी तरह पेड़ों को भी अपना भाई मानकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लेना जरूरी है।
