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फार्मेसी काउंसिल : विधायक नागेंद्र महतो के निवेदन पर विधानसभा ने विभाग से रजिस्ट्रार और परीक्षा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति पर जवाब मांगा

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द फॉलोअप, रांची
विवादित झारखंड फार्मेसी काउंसिल के मामले में क्या अब कोई कार्रवाई होगी। विधायक सरयू राय द्वारा विधानसभा में फार्मेसी काउंसिल का मामला उठाए जाने के अलावा जेएलकेएम द्वारा आंदोलन किए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब विधायक नागेंद्र महतो ने झारखंड विधानसभा की निवेदन समिति में झारखंड फार्मेसी काउंसिल का मुद्दा उठाया है। इसके बाद विधानसभा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को पत्र लिख कर कतिपय गड़बड़ियों पर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। यहां मालूम हो कि बजट सत्र के दौरान विधायक सरयू राय ने भी झारखंड फार्मेसी काउंसिल का मुद्दा उठाया था। उनके सवालों के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा था कि रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। जल्द पूरी कर ली जाएगी। लेकिन अब तक नियमित रजिस्ट्रार की नियुक्ति नहीं हो पायी है।


इसी तरह जेएलकेएम ने भी झारखंड फार्मेसी काउंसिल में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन किया था। जेएलकेएम की मुख्य मांगों में अवैध रूप से कार्यरत प्रभारी सचिव प्रशांत कुमार पांडेय को तत्काल हटाने की मांग की गयी थी। साथ ही काउंसिल का पुनर्गठन करने और काउंसिल में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। जेएलकेएम का कहना था कि स्थायी फार्मासिस्टों को प्राथमिकता नहीं मिल रही है। झारखंड विधानसभा के उप-सचिव की ओर से अपर स्वास्थ्य सचिव को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि विधानसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमावली के अंतर्गत विधानसभा सदस्य नागेंद्र महतो ने निवेदन किया है। विधायक द्वारा उठाये गये बिंदुओं की पर 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट दें, ताकि इसे निवेदन समिति के विचारार्थ पेश किया जा सके।


विधायक नागेंद्र महतो द्वारा निवेदन में कहा गया कि प्रशांत कुमार पांडेय को छह महीने के लिए फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया गया था। छह महीने की अवधि समाप्त होने के बाद भी पांडेय अनियमित रूप से कार्यरत हैं। प्रशांत कुमार द्वारा रणधीर कुमार को नियम विरूद्ध वरीयतम सदस्य घोषित करते हुए परीक्षा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह गंभीर अनियमितता है। जबकि तत्कालीन अध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने रणधीर गुप्ता की कार्यप्रणाली पर आपत्ति करते हुए सक्षम पदाधिकारी से जांच करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद प्रशांत पांडेय और रणधीर गुप्ता दोनों ही अपने पद पर बने हुए हैं।

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