द फॉलोअप डेस्क
राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। जिनका एक सुविधाजनक ढांचे के तहत दोहन करने की जरूरत है । उन्होंने संबंधित हितधारकों से ग्रामीण आबादी, विशेषकर कमजोर लोगों के सामाजिक-आर्थिक सुधार के प्रयासों में सामंजस्य बिठाने का आह्वान किया। उक्त बाते राज्यपाल सी पी राधाकृष्णन ने नाबार्ड झारखंड क्षेत्रीय कार्यालय के 42वां स्थापना दिवस पर कही। जहां वो मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।

नाबार्ड के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला
बता दें कि बुधवार को नाबार्ड झारखंड क्षेत्रीय कार्यालय ने अपना 42वां स्थापना दिवस ऑड्रे हाउस में मनाया। इस अवसर एस के जहागीरदार, मुख्य महाप्रबंधक ने नाबार्ड के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए इसकी उपलब्धियों और दृढ़ प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कार्यक्रम के विषय "सहकार से समृद्धि" पर विचार व्यक्त किया और नाबार्ड द्वारा सहकारी क्षेत्र में चल रही संस्थागत पहलों, जैसे पैक्स कंप्यूटरीकरण, पैक्स के लिए दुनिया की सबसे बड़ी भंडारण योजना, पैक्स की क्षमता निर्माण आदि पर प्रकाश डाला।

नाबार्ड राज्य में विभिन्न कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा
उन्होंने उल्लेख किया कि नाबार्ड राज्य में विभिन्न कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होने बताया की नाबार्ड 42000 एकड़ में 55 वाडी परियोजनाओं को बढ़ावा दे रहा है और 45000 आदिवासी परिवारों को लाभान्वित कर रहा है। इसके अलावा नाबार्ड ने राज्य में सभी 24 जिलों में 46 वाटरशेड परियोजनाओं के माध्यम से 48137 ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा किए हैं और 20,551 करोड़ रुपये का रियायती वित्त 4559 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए RIDF के तहत राज्य सरकार को प्रदान किया है एवं विभिन्न ग्रामीण वित्तीय संस्थानों को 15,500 करोड़ रुपये का रियायती पुनर्वित्त भी प्रदान किया है।
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