नंदलाल तुरी/पाकुड़
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सारथी योजना को पाकुड़ में पलीता लगाने का आरोप सामने आया है। योजना के तहत पाकुड़ शहर में संचालित JRS Technology Private Limited पर साहिबगंज और पाकुड़ के दर्जनों गरीब विद्यार्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने और प्रमाण पत्र मांगने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज आरोप लगा है। मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। दर्जनों छात्रों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित छात्र विद्यार्थियों ने डीसी को दिए आवेदन में बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें बड़े सपने दिखाए गए। छात्रों का आरोप है कि विशाल प्रजापति नामक व्यक्ति ने खुद को सऊदी अरब के बड़े ठेकेदार का बेटा बताकर वीजा और टिकट के नाम पर पैसे ऐंठे। निवेक रवानी से कुल 1,05,900 रुपये लिए गए, जबकि अन्य छात्रों से प्लेसमेंट के नाम पर 1,000 रुपये से लेकर 11,000 रुपये तक की वसूली की गई। छात्र दीपक कुमार ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल ने प्रमाण पत्र मांगने पर गाली-गलौज की।

राजद जिलाध्यक्ष ने संस्थान को दिया अल्टीमेटम
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजद के पाकुड़ जिलाध्यक्ष महावीर मड़ैया ने सेंटर पहुंचकर जायजा लिया। सेंटर सुपरिटेंडेंट से बातचीत के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि संस्थान को दो महीने के भीतर सभी लंबित परीक्षाएं आयोजित कर छात्रों को मुक्त करने का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी दिक्कतों का बहाना अब नहीं चलेगा। साथ ही पैसे की वसूली और जान से मारने की धमकी के आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो जिला प्रशासन और विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी।

17 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी कहानी
विद्यार्थियों ने बताया कि 17 नवंबर 2025 से शुरू हुआ तीन माह का प्रशिक्षण 22 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया था। इसके बाद से छात्र अपने प्रमाण पत्र और रोजगार की उम्मीद में भटक रहे हैं। 18 मई को जब छात्र सेंटर पहुंचे तो प्रोजेक्ट मैनेजर और मकान मालिक पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया। छात्रों ने उपायुक्त से न्याय, जमा राशि की वापसी और प्रमाण पत्र दिलाने की मांग की है।
दूसरी ओर, संस्थान के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल खान ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण परीक्षा और प्रमाण पत्र देने में देरी हुई है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। नौकरी के नाम पर पैसे लेने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान की छवि खराब करने के उद्देश्य से ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं।