रांची
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ झारखंड की जनता के अधिकारों की लड़ाई अब सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक लड़ी जाएगी। 26 सितंबर को कांग्रेस लोक भवन मार्च के माध्यम से राज्य के हितों से जुड़े गंभीर सवालों को मजबूती से उठाएगी। उन्होंने कहा कि सवाल सिर्फ खदान का नहीं, झारखंड के संवैधानिक अधिकार का है। झारखंड की धरती से खनिज निकलता है, खनन का पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव झारखंड की जनता झेलती है, लेकिन अब राज्य के राजस्व और संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। यह केवल खनन नीति का विषय नहीं, बल्कि संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों का सवाल है।

MMDR संशोधन प्रस्ताव ने कई नए सवाल खड़े किए हैं
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने राज्यों की mineral rights पर कराधान शक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों पर फैसला दिया था। इसके बाद 2026 के MMDR संशोधन प्रस्ताव ने कई नए सवाल खड़े किए हैं। केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका झारखंड के राजस्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने केंद्र से पूछा, जब खनिज झारखंड की धरती का है, खनन का बोझ झारखंड उठाता है, तो राजस्व अधिकारों पर अंतिम शर्तें केंद्र क्यों तय करे? क्या सहकारी संघवाद का अर्थ यही है कि संसाधन राज्यों में रहें, लेकिन अधिकारों का इस्तेमाल केंद्र की शर्तों पर हो?
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कांग्रेस खनन या विकास के खिलाफ नहीं
कांग्रेस नेता ने पूछा, क्या पहले से उत्पन्न राज्य के राजस्व दावों को नए कानून के जरिए समाप्त किया जा सकता है?
क्या MMDR संशोधन के प्रत्येक प्रावधान को संविधान के Article 246, Entry 49, Entry 50 और Entry 54 की कसौटी पर परखा गया है? केशव महतो ने आगे कहा, कांग्रेस खनन या विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर झारखंड के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों को कमजोर करने का विरोध करेगी। झारखंड ने देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को अपनी खनिज संपदा दी है, अब झारखंड को उसके हिस्से का न्यायपूर्ण राजस्व और संवैधानिक सम्मान भी मिलना चाहिए।
‘चंदा चोरी’ पर भी केंद्र से जवाब मांगेगी कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 26 सितंबर का लोक भवन मार्च केवल MMDR का मुद्दा नहीं होगा। कांग्रेस मंदिर निर्माण के नाम पर चंदे और उससे जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के सवाल पर भी केंद्र से जवाब मांगेगी। उन्होंने कहा कि जनता के आस्था से जुड़े विषयों में यदि धन संग्रह किया गया है, तो उसके स्रोत, संग्रह, उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कांग्रेस किसी की आस्था के खिलाफ नहीं है, लेकिन आस्था के नाम पर आर्थिक पारदर्शिता के सवालों को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े हर सवाल का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए।
