द फॉलोअप डेस्क
MMDR एक्ट को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच जारी गतिरोध अब निर्णायक कानूनी लड़ाई का रूप लेने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले सरकार ने मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस मुद्दे पर महाधिवक्ता ने भी अपना कानूनी ओपिनियन राज्य सरकार को सौंप दिया है। महाधिवक्ता की ओर से कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने को हरी झंडी मिलने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की तैयारी तेज कर दी है। महाधिवक्ता के ओपिनियन में राज्य सरकार के कानूनी दावों को मजबूत बताया गया है। इसी आधार पर अब सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली याचिका को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार की ओर से शीर्ष वकीलों की टीम इस मामले में ठोस कानूनी आधार के साथ याचिका का ड्राफ्ट तैयार कर रही है। सरकार का मानना है कि मामले के कानूनी पहलुओं को मजबूती से सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जा सकता है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद MMDR एक्ट को लेकर केंद्र और राज्य के बीच विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंचने वाला है। मामले को लेकर सरकार की ओर से सभी जरूरी कागजी और कानूनी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब राज्य ही नहीं, बल्कि खनिज संपदा से जुड़े दूसरे राज्यों की भी नजर रहेगी।
