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देवघर के अस्पताल में शव को बंधक बनाए जाने के मामले में मंत्री इरफान अंसारी ने लिया संज्ञान, बोले दोषियों पर होगी कार्रवाई

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द फॉलोअप डेस्कः
देवघर में अस्पताल से शव छुड़ाने के बदले में मां को जमीन बेचनी पड़ी। अखबारों में खबर छपने के बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कर कहा है कि वह अपना कार्यक्रम स्थगित कर देवघर पहुंच रहे हैं। पीड़ित परिवार के साथ न्याय होगा। अगर अस्पताल प्रबंधक दोषी पाए गये तो कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं भवनाथपुर के पूर्व विधायक भानू प्रताप शाही ने स्वास्थय मंत्री इरफान अंसारी पर निशाना साधा है और कहा है कि इरफान अंसारी को चापाकल में डूब जाना चाहिए। जब कोई सुनता नहीं आपकी तो रात दिन बक-बक क्यों करते हैं। 


दरअसल झारखंड के देवघर में शर्मनाक मामला सामने आया है। जहां अस्पताल का बिल चुकाकर बेटे का शव लेने के लिए मां को जमीन बेचनी पड़ी। दरअसल मोहनपुर के चकरमा गांव निवासी कन्हैया कापरी की इलाज के दौरान मेधा सेवा सदन में शुक्रवार को मौत हो गई। 1 अप्रैल से कन्हैया को यहां भर्ती कराया गया था। इस दौरान इलाज 40 हजार का बिल बना। लेकिन परिजन बिल नहीं चुका पाए तो अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इंकार कर दिया। आखिरकार जमीन बेचकर और चंदा जुटाकर परिजनों ने पैसे दिए जिसके बाद शव को छोड़ा गया। इधर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला ने जो भी आरोप लगाए हैं वह निराधार हैं, वो सारे सबूत देने के लिए तैयार हैं। 


मां वीणा देवी का कहना है कि बेटे कन्हैया का शव लेने के लिए उसने अपनी जमीन बेच दी। वीणा ने बताया कि मंगलवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से जख्मी बेटे को इलाज के लिए मेधा सेवा सदन में भर्ती कराया था, जहां शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। महिला ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने बेटे की मौत के बाद शव देने से इनकार कर दिया था। तब महिला को अपनी जमीन बेचकर पैसे चुकाने पड़े। वहीं दूसरी ओर मेधा सेवा सदन के संचालक डॉ. संजय ने कहा कि शव को बंधक नहीं बनाया गया था। परिजन शव ले गए। इलाज में 44 हजार रुपए का बिल बना था, लेकिन परिजनों ने सिर्फ 10 हजार ही दिया। पैसे के लिए बंधक बनाया जाता तो पूरे पैसे लिए जाते। सीसीटीवी फुटेज देख सकते हैं। जिससे आरोप निराधार साबित होंगे। उसी घटना में गंभीर दो अन्य युवकों का इलाज अभी भी क्लीनिक में ही चल रहा है।