द फॉलोअप, रांची
झारखंड हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए बैंक लॉकर में रखे गहनों पर पत्नी के अधिकार को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉकर में रखे महिला के गहने उसके स्त्रीधन हैं और पति पत्नी की जानकारी या सहमति के बिना लॉकर का संचालन नहीं कर सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच ने बोकारो निवासी अनिल कुमार सिंह की ओर से दायर प्रथम अपील पर सुनाया। कोर्ट ने बोकारो फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2024 के आदेश के खिलाफ पति की अपील को खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला?
मामला बोकारो के बी.एस. सिटी स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की शाखा के लॉकर नंबर GB-69 से जुड़ा है। यह लॉकर अनिल कुमार सिंह और उनकी पत्नी प्रिया राज के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज था। प्रिया राज ने अदालत में दावा किया था कि उनके मायके और ससुराल पक्ष से शादी के दौरान मिले करीब 25 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण लॉकर में रखे गए थे। शादी के बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ और पत्नी को घर छोड़ना पड़ा। इसके बाद उनका स्त्रीधन पति और बैंक की कस्टडी में रह गया। पत्नी का आरोप था कि बार-बार मांग करने के बावजूद पति ने उनके आभूषण वापस नहीं किए। इसके बाद उन्होंने अपने स्त्रीधन की सुरक्षा और उनकी सहमति के बिना लॉकर खोले जाने पर रोक लगाने के लिए बोकारो फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

पति ने किया था दावे का विरोध
पति अनिल कुमार सिंह ने पत्नी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि प्रिया राज अपना पूरा स्त्रीधन अपने साथ ले जा चुकी हैं। पति का दावा था कि लॉकर में रखे बाकी गहने उसकी मां, बहन और भाभी के हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने पति के इस दावे को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि पति अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। उसने अपनी मां, बहन या भाभी में से किसी को भी गवाह के तौर पर अदालत में पेश नहीं किया। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पत्नी अपने बयान पर कायम रही और उसका बयान विश्वसनीय पाया गया। वहीं, सास के बयान से यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित लॉकर शादी के बाद ही खोला गया था।
पत्नी के स्त्रीधन पर कोर्ट ने कही अहम बात
सभी तथ्यों और सबूतों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि बोकारो फैमिली कोर्ट के दिसंबर 2024 के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। कोर्ट ने पत्नी के स्त्रीधन के अधिकार को बरकरार रखते हुए पति को पत्नी की जानकारी और सहमति के बिना संयुक्त बैंक लॉकर संचालित करने से रोक दिया। हाईकोर्ट ने साफ किया कि लॉकर में रखा स्त्रीधन महिला की पूर्ण संपत्ति है और केवल लॉकर संयुक्त नाम पर होने से पति को उस पर मनमाना अधिकार नहीं मिल जाता।
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