जमशेदपुर
पोटका प्रखंड के मेचुआ गांव में प्रशासनिक डेटा से गांव का नाम गायब होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों ने गांव में चल रहे जनगणना (हाउस लिस्टिंग) के काम को रोक दिया और सर्वे टीम को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकारी रिकॉर्ड में उनके गांव का नाम नहीं जोड़ा जाता, तब तक वे किसी भी तरह का सर्वे नहीं होने देंगे। 
जनगणना का विरोध और ग्रामीणों का आरोप
दरअसल, मेचुआं गांव में उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी, जब ग्रामीणों ने जनगणना विभाग के कर्मचारियों को जानकारी देने से इनकार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि ACC (आधारभूतू जनगणना) डाटा में उनके मेचुआ गांव का नाम ही शामिल नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले लगभग 15 वर्षों से मेचुआ गांव सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण मंगल सोरेन ने कहा कि जब तक गांव का नाम एसीसी डाटा में जोड़ा नहीं जाता, तब तक गांव में किसी भी प्रकार का सर्वे या जनगणना कार्य नहीं होने दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि सोमवार को ग्रामीण पोटका प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ से मिलेंगे और अपनी समस्याओं से अवगत करायेंगे।
जनगणना टीम और बीडीओ का पक्ष
इधर, जनगणना टीम के कर्मचारी संतु कुमार ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के तहत वे हाउस लिस्टिंग सर्वे करने गांव पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्य नहीं हो सका। पूरे मामले की रिपोर्ट पोटका बीडीओ को सौंप दी गयी है। वहीं पोटका के बीडीओ अरुण मंडा ने कहा कि ग्रामीण सरना कोड से जुड़े मुद्दे को लेकर भ्रमित हैं, जबकि जनगणना कार्य का उससे कोई संबंध नहीं है।
प्रशासनिक कार्रवाई और अधिकारियों के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त राजीव रंजन ने जांच के आदेश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य सरकार के निर्देश पर कराया जा रहा है। यदि ग्रामीणों को किसी प्रकार की परेशानी या भ्रम है तो वे प्रखंड, अनुमंडल अथवा जिला स्तर के अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। वहीं, जिला जनगणना पदाधिकारी मोहम्मद मोजाहिद अंसारी ने कहा कि फिलहाल उन्हें घटना की जानकारी नहीं मिली है। पोटका के चार्ज पदाधिकारी से रिपोर्ट मांगी गयी है।