द फॉलोअप डेस्क
देश में कर्नाटक एक ऐसा राज्य बनने जा रहा है जिसने शराब की बिक्री पर सरकारी नियंत्रण समाप्त करेगा। कर्नाटक सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसकी घोषणा की गयी है। कर्नाटक सरकार ने कहा है कि नयी शराब नीति का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और राज्य में शराब बेचनेवाली कंपनियों को प्रतिस्पर्द्धी बनाना है। कर्नाटक सरकार की नयी शराब नीति एक अप्रैल 2026 से लागू होगी। इस नयी नीति के तहत कर्नाटक में शराब बेचनेवाली कंपनियां अपने उत्पाद की कीतम खुद निर्धारित करेगी।

नयी शराब नीति में अल्कोहल-इन-बेवरेज (AIB) टैक्स प्रणाली लागू होगी। इसमें अब पेय पदार्थ की मात्रा की बजाय उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा (strength) के आधार पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) लगाएगा। यह प्रणाली अप्रैल 2026 से चरणों में लागू की जाएगी। यहां मालूम हो कि विश्व के प्रमुख देशों में भी शराब में अल्कोहल की मात्रा के अनुसार सरकार टैक्स लगाती है। इसके अलावा नयी नीति में मौजूदा 16 प्राइस स्लैब को घटाकर केवल 8 स्लैब कर दिया गया है ताकि प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।

कर्नाटक की नयी शराब नीति में कई और सुधार के प्रयास भी किए गए हैं। विनिर्माण लाइसेंस अब ऑटो-रिन्यू होंगे। लेबल अनुमोदन और सामयिक लाइसेंस (CL-5) ऑनलाइन स्व-घोषणा के माध्यम से ऑटो-जेनरेट होंगा। शराब की आवाजाही पर नज़र रखने के लिए ब्लॉकचेन-आधारित ट्रैकिंग और भू-फेंस्ड (geo-fenced) ई-लॉक सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। भट्टियों (distilleries) और ब्रुअरीज को अपने परिसर में पर्यटकों को चखने (tasting sessions) और सीधे उत्पाद बेचने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, ब्रुअरीज को अब 24 घंटे परिचालन की अनुमति होगी।
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कर्नाटक में शराब हो सकती है सस्ती
नयी नीति से कर्नाटक में शराब सस्ती हो सकती है। क्योंकि प्रतिस्पर्द्धा के कारण शराब निर्माता कंपनियां अधिक से अधिक शराब बेचने के लिए अपनी कीमत घटा सकती है।
शराब और भ्रष्टाचार का अन्योनाश्रय संबंध रहा है
देश में शराब और भ्रष्टाचार का अन्योनाश्रय संबंध रहा है। हाल में झारखंड में भी शराब घोटाले की जांच चल रही है। उससे पहले छत्तीसगढ़ में भी अरबों रुपए के शराब घोटाले की जांच जारी है। दिल्ली में हुए शराब घोटाले में वहां के मुख्यमंत्री अरविंद केरजरीवाल को जेल जाना पड़ा था।
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