द फॉलोअप डेस्क
राज्य के लाखों ओबीसी छात्रों के बकाए छात्रवृत्ति का भुगतान जल्द प्रारंभ हो जाएगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति की राशि भुगतान के लिए लगभग 350 करोड़ की राशि रिलीज कर दी है। कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि राशि को आदिवासी कल्याण आयुक्त कार्यालय भेज दिया गया है। इसके बाद आदिवासी कल्याण आयुक्त कार्यालय जिलावार छात्रों की संख्या के अनुरूप जिला कल्याण पदाधिकारियों को राशि को रिलीज करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। जल्द ही जिलों में राशि चली जाएगी और छात्रों को छात्रवृत्ति राशि का भुगतान प्रारंभ हो जाएगा। मालूम हो कि पिछले दिनों विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कल्याम मंत्री चमरा लिंडा ने आश्वासन दिया था कि केंद्र से छात्रवृत्ति मद में पैसा नहीं मिलने के बाद राज्य सरकार इसका रास्ता निकाल रही है। उन्होंने बताया कि तकनीकी पेंचों को सुलझाने के लिए उन्होंने वित्त विभाग को पत्र भी लिखा है। जानकारी के अनुसार इसके बाद ही राज्य सरकार ने छात्रवृत्ति की राशि भुगतान का रास्ता निकाला।

यहां मालूम हो कि राज्य के लगभग साढ़े तीन लाख से चार लाख छात्रों की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हो पा रहा है। राज्य के ओबीसी और एससी वर्ग के प्री-मैट्रिक (कक्षा 9वीं-10वीं) और पोस्ट मैट्रिक छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति का पूर्ण केंद्रांश अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। इसके कारण राज्यभर में छात्र आंदोलनरत हैं। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 21 अक्टूबर 2024 और 11 जून 2025 को केंद्र सरकार को कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने पत्र भी भेजा था। वहीं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 29 दिसंबर 2023, 5 जुलाई 2024 और 18 जुलाई 2025 को पत्राचार किया गया है। इसके अलावा लिंडा ने दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले से मिल कर छात्रवृत्ति भुगतान का आग्रह किया था। उस समय भी अठावले ने सकारात्मक सकारात्मक आश्वासन दिया था।

केंद्र को भेजे पत्र में मंत्री लिंडा ने उल्लेख किया था कि ओबीसी और एससी वर्ग के प्री-मैट्रिक (कक्षा 9वीं-10वीं) और पोस्ट मैट्रिक छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति का पूर्ण केंद्रांश अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। इसके कारण राज्यभर में छात्र आंदोलनरत हैं। पोस्ट मैट्रिक ओबीसी छात्रवृत्ति के तहत वर्ष 2023-24 में 271.37 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जबकि केंद्र से मात्र 77.31 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसी तरह 2024-25 में 253.21 करोड़ की मांग के मुकाबले सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये मिले। वहीं 2025-26 में 370.17 करोड़ रुपये की मांग के बावजूद एक भी पैसा नहीं मिला। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। वर्ष 2023-24 में 67.88 करोड़ रुपये की मांग के बदले केवल 7.35 करोड़ रुपये मिले। 2024-25 में 66.14 करोड़ की मांग पर 11.61 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि 2025-26 के लिए मांगे गए 45.91 करोड़ रुपये के बदले मात्र 3.95 करोड़ रुपये ही केंद्र से मिले।
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