द फॉलोअप, जमशेदपुर:
माइनिंग एंड मिनरल डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (MMDR) एक्ट, 1957 को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता सह बहरागोड़ा के पूर्व विधायक कुणाल षड़ंगी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि झारखंड में खनन और खनिज संसाधनों से जुड़े नियमों की तुलना दूसरे राज्यों से करना वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना है। कुणाल षड़ंगी ने कहा कि झारखंड में खनन की परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। यहां कोयले की गुणवत्ता, खनन क्षेत्र और राज्य की सामाजिक-सांस्कृतिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सेस और अन्य प्रावधान तय किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में मिलने वाले कोयले का अपना अलग ग्रेड और मापदंड है। ऐसे में दूसरे राज्यों के साथ इसकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से लगाया जाने वाला सेस ओडिशा की तुलना में काफी कम है। कोयला कोई आईफोन नहीं है, जिसे कहीं भी उपलब्ध होने पर खरीदकर दूसरी जगह लाया जा सके। खनन की पूरी प्रक्रिया स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों पर निर्भर करती है। उन्होंने भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के झारखंड सरकार के नेताओं का क्लास लेने वाले बयान पर भी पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं को इस मुद्दे पर खुली बहस की चुनौती देते हैं। जरूरत पड़ी तो वे भाजपा नेताओं की ऑनलाइन क्लास लेने के लिए भी तैयार हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए कुणाल षड़ंगी ने कहा कि वे ऐसे बयान देकर जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
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संसद में झारखंड के भाजपा सांसदों की आवाज क्यों नहीं सुनायी दी
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की प्राथमिकता केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की नीतियों का समर्थन करना रह गयी है, जबकि उन्हें राज्य की जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने झारखंड के भाजपा सांसदों पर भी सवाल उठाया और कहा कि MMDR एक्ट के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा में झारखंड के भाजपा सांसदों की आवाज क्यों नहीं सुनायी दी। उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि यदि वे झारखंड के हितों को लेकर गंभीर हैं तो संसद में इस मुद्दे पर उनका रुख क्या रहा। कुणाल षड़ंगी ने कहा कि प्रदेश भाजपा के नेताओं और बाबूलाल मरांडी को वे खुली चुनौती देते हैं कि वे इस मुद्दे पर उनके साथ बहस करें। उन्होंने कहा कि वह MMDR एक्ट और खनन से जुड़े प्रावधानों पर भाजपा नेताओं के लिए ऑनलाइन क्लास लेने को भी तैयार हैं।

राज्य सरकार MMDR एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में
उन्होंने भाजपा नेताओं के कुछ अन्य बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड में सीएनटी-एसपीटी एक्ट और खनन से जुड़े स्थानीय प्रावधानों की अपनी पृष्ठभूमि है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता तथ्यों की जगह ऊलजलूल और भ्रम फैलाने वाली बयानबाजी कर रहे हैं। कॉरपोरेट हितों की भाषा बोलना भाजपा को बंद करना चाहिए। पूर्व विधायक ने कहा कि राज्य सरकार MMDR एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है और उन्हें पूरा विश्वास है कि इस मामले में राज्य के हितों को मजबूती से रखा जायेगा। झारखंड की जनता पिछले दो विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है और यह भी बता चुकी है कि किसने बाहर से भीड़ लाने की राजनीति की है।