जामताड़ा
करमदहा मंदिर, जो दुखिया महादेव के नाम से प्रसिद्ध है, आस्था का एक बड़ा केंद्र है. यह मंदिर जामताड़ा जिले के नारायणपुर में मौजूद है. हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर यहाँ लगने वाले प्रसिद्ध मेले से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है. इस वर्ष डाक राशि लगभग 59,07,000 रुपये रही. करीब 60 लाख रुपये का मुनाफा देने के बावजूद श्रद्धालुओं को यहाँ बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है. मंदिर परिसर में बने पुराने हटिया शेड और विश्रामालय अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं. जर्जर छतों से गिरता प्लास्टर और दरकती दीवारें किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं. मेले के दौरान उमड़ने वाली हजारों की भीड़ इन्हीं खतरनाक ढांचों के नीचे शरण लेने को मजबूर होती है.

शुद्ध पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं
लाखों रुपये का राजस्व देने वाले इस क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. श्रद्धालु बराकर नदी के दूषित पानी का उपयोग करने को विवश हैं. कचरा प्रबंधन और डस्टबिन की कमी के कारण आस्था का यह पवित्र केंद्र धीरे-धीरे गंदगी का ढेर बनता जा रहा है. स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार इस मंदिर को केवल राजस्व के स्रोत के रूप में देख रही है. लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहा है.
