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कल्पना सोरेन ने कहा- कोर्ट में हो या रोड पर, हम लड़ने को तैयार हैं

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फॉलोअप डेस्क
राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट पर चर्चा के दौरान झामुमो विधायक कल्पना सोरेन भाजपा विधायक नीरा यादव को कई तरह की चुनौती दे डाली। नीरा यादव जब चर्चा के दौरान राज्य सरकार की नाकामियां और केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिना रही थी, कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड में केंद्र रोड हो या ट्रेन मार्ग, सब यहां से खजाना ले जाने के लिए बना रही है। उन्होंने कहा कि यह तो बताइए कि राज्य का 1.36 लाख करोड़ बकाया कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह भी तो बताइए कि कितने लोगों को केंद्र ने जेल भेजवाने का काम किया। लेकिन हम अपनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। झारखंड अपनी इज्जत और ईमान को यहां से बाहर नहीं जाने देगा। एमएलए हो यहां की जनता अपनी लड़ाई खुद लड़ेगी। उन्होंने कहा कि रोड पर हो या कोर्ट में, हम लड़ने को तैयार हैं।


रोजगार देंगे, नहीं तो भत्ता देंगे, अन्यथा सन्यास ले लेंगे, क्या हुआ 
इससे पूर्व नीरा यादव ने कहा कि यूपीए के समय 2014 में रेलवे को झारखंड में 457 करोड़ दिया था, आज 7903 करोड़ की राशि दी गयी है। ग्रीन कार्ड राशनधारियों को आज अनाज नहीं मिल रहा। गुरुजी क्रेडिट कार्ड का क्या हुआ। क्या इंजीनियर बनाने की मां-बाप की चिंता दूर हो गयी। गुरुजी क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करनेवाले युवाओं के आवेदन नहीं बढ़ रहे। पहले किसी योजना का लाभ लेने की बिना पर उनके आवेदन को रिजेक्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने कहा था कि युवाओं को रोजगार देंगे। नहीं तो बेरोजगारी भत्ता देंगे। नहीं तो सन्यास ले लेंगे। क्या हुआ।

मंत्रियों के लिए 70 करोड़ से आलीशान बंगला
नीरा यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि अनुपयोगी भवन नहीं बनाएंगे। लेकिन आज 70 करोड़ से मंत्रियों के लिए आलीशान बंगला बनाया गया है। पंचायत स्तर पर खोले गये कमल क्लब बंद कर सिदो-कान्हों क्लब खोला गया। लेकिन कोई भी कार्यरत नहीं है। शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। जेपीएससी डेढ़ साल पहले लिए परीक्षा का रिजल्ट नहीं निकाल सका है। सीडीपीओ का रिजल्ट नहीं निकला। प्राइवेट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज ऊंची फीस लेकर नामांकन ले रहे हैं। सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में नामांकन नहीं हो रहा। बेरोजगार छात्र 44 पन्ने के बजट भाषण में अपने लिए क्या है, ढूंढ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनसंख्या बढ़ रही है और स्वीकृत सरकारी पद घट रहे हैं। पहले स्वीकृत पद 5.33 लाख थे, अब 3.27 लाख हो गए। अब न पद रहेंगे और ना सरकार पर नौकरी देने का दबाव पड़ेगा।

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