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JSSC-CGL मामले पर हाईकोर्ट ने सरकार से 48 घंटे में मांगा जवाब

JSSC-CGL मामले पर हाईकोर्ट ने सरकार से 48 घंटे में मांगा जवाब

द फॉलोअप डेस्क
JSSC की परीक्षाओं और JSSC-CGL के जरिए हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल मामलों पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने सरकार के आदेश पर पहले से लागू रोक को जारी रखा। इससे JSSC-CGL के माध्यम से चयनित होकर सरकारी सेवा में आए नवनियुक्त अफसरों को फिलहाल राहत मिल गई है। सरकार के आदेश से प्रभावित इन अफसरों ने अपनी नियुक्ति बचाने के लिए हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। नियुक्ति से जुड़े सैकड़ों प्रार्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार को 48 घंटो में जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तिथि निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक बरकरार रखते हुए JSSC-CGL की परीक्षा पास कर नौकरी के लिए चयनित हुए नवनियुक्त अफसरों को बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि कोर्ट को पुलिस पर पूरा भरोसा है लेकिन शुरूआती जांच के बाद की जांच थोड़ी सुस्त हो गई है। 

निरोज कुमार खेस समेत कई अफसर पहुंचे कोर्ट

JSSC-CGL के जरिए चयनित अभ्यर्थियों में शामिल निरोज कुमार खेस, रमेश उरांव समेत अन्य लोगों ने सरकार के फैसले को चुनौती दी है। इन याचिकाओं में सरकार की ओर से परीक्षा और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द किए जाने के आदेश पर सवाल उठाया गया है। प्रार्थियों की ओर से राज्य के पूर्व महाधिवक्ता और वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन के अलावा अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, कुमार हर्ष, अमृतांश वत्स, दीपांकर राय, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। मामले में सैकड़ों चयनित और नवनियुक्त अफसरों की स्थिति सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

कोर्ट ने जांच की रफ्तार पर भी उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि इसका असर बड़ी संख्या में लोगों के भविष्य पर पड़ रहा है। अदालत ने राज्य सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, मामले की जांच की गति को लेकर भी कोर्ट ने टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस पर उसे पूरा भरोसा है, लेकिन जांच की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है, यह सवाल महत्वपूर्ण है। अब सरकार के जवाब और जांच की प्रगति पर अगली सुनवाई में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल हाईकोर्ट की रोक बरकरार रहने से JSSC-CGL के जरिए चयनित नवनियुक्त अफसरों को बड़ी राहत मिली है।

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