द फॉलोअप डेस्क
जेएसएससी सीजीएल केस में सोमवार को सीआईडी ने 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की। वहीं एसआईटी ने इस मामले में रिमांड पर लिए गए सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार से रिमांड के चौथे दिन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों ने आईसीएन से जुड़े मिथिलेश सिंह की संलिप्तता की जानकारी दी और उसे इस मामले का किंगपिन बताया। दोनों ने कई सफल अभ्यर्थियों के संपर्क में होने की जानकारी भी सीआईडी को दी है। इसी आधार पर सीआईडी अलग-अलग चेन के जरिए संपर्क में आए संदिग्ध सफल अभ्यर्थियों को नोटिस देकर पूछताछ कर रही है। अब तक करीब 150 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा चुकी है। पांच दिनों की रिमांड पूरी होने के बाद सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को मंगलवार को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों को दोबारा रिमांड पर लिया जा सकता है। जेएसएससी और जेपीएससी परीक्षाओं में अनियमितता की जांच के दौरान परीक्षा आयोजित कराने वाली करीब आधा दर्जन एजेंसियां सीआईडी की रडार पर आ चुकी हैं। जेपीएससी मामले में टीडीपीएल के साथ-साथ बिनसिस की भूमिका संदिग्ध के तौर पर सामने आई है, जबकि जेएसएससी सीजीएल केस में बेवल, आईसीएन, मां चामुंडेश्वरी समेत कई एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। वहीं जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच के दौरान सीआईडी अब सॉल्वर गैंग तक भी पहुंच रही है। टीडीपीएल ने अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों को अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने के लिए रांची बुलाया था। ये विशेषज्ञ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के रहने वाले हैं। अब सीआईडी इन सभी का बयान दर्ज करेगी और इन्हें जेपीएससी केस में आरोपी भी बनाया जाएगा।

40 लाख देने की बात कबूली
इधर, अभय तिवारी और हेमंत वर्मा ने सीआईडी को दिए अपने बयान में बताया है कि सहायक वन संरक्षक और क्षेत्रीय वन अधिकारी की मुख्य परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उनके नंबर बढ़ाए जाते थे। इसके लिए रांची के हरिओम टावर समेत कई अन्य किराए के मकानों और होटलों में ठिकाने बनाए गए थे, जहां सॉल्वर गैंग के सदस्य परीक्षा लिखते थे। पूछताछ में सामने आया है कि टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह की मदद से जेपीएससी के स्ट्रांग रूम से चयनित अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकाली जाती थीं। इसके बाद यूपी, पंजाब और हरियाणा से बुलाए गए एक्सपर्ट्स और प्रोफेसर्स की निगरानी में किराए के कमरों में खाली उत्तर पुस्तिकाओं को अभ्यर्थियों से दोबारा भरवाया जाता था। उत्तर पुस्तिकाएं तैयार होने के बाद उन्हें वापस स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता था। इसके लिए अकेले अभय तिवारी ने 40 लाख रुपये देने की बात कबूल की है। इसमें सानंद प्रकाश की भूमिका भी बताई गई है। सानंद प्रकाश के खिलाफ सीआईडी वारंट ले चुकी है और उसकी तलाश जारी है।

14वीं JPSC और ACF PT में भी गड़बड़ी का दावा
हेमंत वर्मा ने सीआईडी को दिए बयान में कहा है कि 14वीं जेपीएससी और एसीएफ की प्रारंभिक परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी। ओएमआर शीट की स्कैनिंग के दौरान सिस्टम में उत्तर भरकर अपलोड किए जाते थे। 14वीं जेपीएससी में करीब 100 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में हेरफेर कर उन्हें पास कराया गया, जबकि एसीएफ पीटी में 15 से 20 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में मैनिपुलेशन किए जाने का दावा किया गया है। बयान के मुताबिक गड़बड़ी के वक्त जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांगते, उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, मो. उस्मान, प्रदीप कुमार सिंह और हेमंत वर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहते थे। अब सीआईडी इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और कथित तौर पर लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों की पहचान करने में जुटी है।