जमशेदपुर
JPSC-JSSC में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार की शाम छात्रों के द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने के दौरान कई जिलों में झड़प हो गयी। छात्रों के द्वारा झामुमो कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया जा रहा है। अब इस मामले को लेकर बीजेपी राज्य सरकार पर जमकर निशाना साध रही है। शनिवार को जमशेदपुर के साकची स्थित जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो ने कहा कि लाठी-डंडे, पुलिसिया दबाव और राजनीतिक संरक्षण के जरिए युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि रांची, हजारीबाग, गिरिडीह समेत राज्य के कई जिलों में रोजगार, परीक्षा में पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट की गई।

लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। विद्युत वरण महतो ने कहा कि छात्र कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं, बल्कि वे परीक्षा में पारदर्शिता, नियुक्तियों में निष्पक्षता और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ताओं द्वारा छात्रों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आना गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग जिलों में एक साथ हुई घटनाएं महज संयोग हैं या इसके पीछे कोई रणनीति है, इसकी जांच होनी चाहिए। सांसद ने पुलिस प्रशासन की भूमिका की भी जांच की मांग की।

झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़
भाजपा सांसद ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को अपनी प्रक्रिया पर भरोसा है तो स्वतंत्र जांच एजेंसी से उसे परहेज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी खुद को युवाओं और संविधान का समर्थक बताती है, वह झारखंड में छात्रों के साथ हो रही घटनाओं पर चुप क्यों है। सांसद ने कांग्रेस नेतृत्व से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। विद्युत वरण महतो ने आगे कहा कि सरकार को दमन का रास्ता छोड़कर संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि जांच के दायरे में नेताओं और अधिकारियों की भूमिका भी शामिल होनी चाहिए।